भारत में उच्च शिक्षा का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत IITs, IIMs और अन्य प्रमुख संस्थानों को नए अंतर् विषयक स्नातक कार्यक्रम शुरू करने की अनुमति मिली है।
ब्रिटिश काउंसिल की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की 79% आबादी स्नातक स्तर तक ही शिक्षा प्राप्त करती है। नैसकॉम की रिपोर्ट बताती है कि डेटा साइंस से जुड़ी नौकरियों की मांग हर साल 30% बढ़ रही है। 2026 तक मशीन लर्निंग इंजीनियर्स और डेटा आर्किटेक्ट्स की मांग 10 लाख से ज्यादा होने की उम्मीद है।
कई प्रमुख संस्थानों ने नए कोर्स शुरू किए हैं। IIT मद्रास ने डेटा साइंस में ऑनलाइन बीएस कोर्स की शुरुआत की है। IIT मंडी ने जनरल इंजीनियरिंग और कंप्यूटिंग में नए पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग ने दूरस्थ शिक्षा में बीए ऑनर्स प्रोग्राम शुरू किए हैं।
IIM संबलपुर ने डेटा साइंस और AI में बीएस के साथ मैनेजमेंट और पब्लिक पॉलिसी में बीएस कोर्स की शुरुआत की है। नई शिक्षा नीति के तहत ये कोर्स उद्योग की जरूरतों के अनुरूप हैं। इनमें लचीला शैक्षणिक ढांचा है। छात्रों को सर्टिफिकेट से लेकर ऑनर्स डिग्री तक के विकल्प मिलते हैं। इंटर्नशिप और प्रोजेक्ट के जरिए व्यावहारिक अनुभव भी मिलता है।
भविष्य में उच्च शिक्षा के विकल्प: ये कोर्सेस MBA, M.S., Ph.D. या पब्लिक पॉलिसी मास्टर्स में मजबूत नींव रखते हैं। IIM संबलपुर जैसे संस्थानों का प्रयास शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखकर, उसे एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाना है जहां से छात्र देश और दुनिया के लिए जिम्मेदार नेता, विश्लेषक और नीति निर्माता बनकर उभर सकें।
इन कार्यक्रमों की शुरुआत भारत के शिक्षा परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर इशारा करती है। यह एक ऐसा बदलाव जो डिजिटल प्रौद्योगिकी, नीति निर्माण और मानव पूंजी के उन्नयन को केंद्र में रखता है।
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