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क्या आपने कभी ऐसे लोगों को देखा है जो सुबह उठते ही सबसे पहले सोशल मीडिया पर स्टोरी लगा देते हैं? चाय पी रहे हों, जिम गए हों, नई ड्रेस पहनी हो, दोस्तों के साथ घूमने निकले हों या फिर रात का खाना खा रहे हों, हर पल की फोटो या वीडियो इंटरनेट पर जरूर दिखाई देती है. कई बार तो ऐसा लगता है कि अगर उन्होंने पोस्ट नहीं किया, तो जैसे वह पल हुआ ही नहीं.
ऐसे लोगों को देखकर अक्सर मन में एक सवाल जरूर आता है कि आखिर कोई अपनी जिंदगी की हर छोटी-बड़ी बात सोशल मीडिया पर क्यों शेयर करता है? क्या उन्हें सिर्फ लाइक्स और कमेंट्स पसंद होते हैं? क्या वे लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचना चाहते हैं? या फिर इसके पीछे इंसानी दिमाग और व्यवहार से जुड़ा कोई ऐसा राज छिपा है, जिसके बारे में ज्यादातर लोग जानते ही नहीं?
साइकोलॉजिस्ट विंदा सिंह कहती हैं कि सच तो यह है कि हर बार वजह दिखावा नहीं होती. कुछ लोग अपनी खुशियां बांटना पसंद करते हैं, कुछ यादों को संभालकर रखना चाहते हैं, तो कुछ के लिए सोशल मीडिया अपने दोस्तों और परिवार से जुड़े रहने का सबसे आसान तरीका बन चुका है. यानी हर चीज पोस्ट करने वाले सभी लोग एक जैसे नहीं होते. उनके पीछे अलग-अलग सोच, आदतें और मनोवैज्ञानिक कारण काम करते हैं. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि जो लोग अपनी जिंदगी का हर पल सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं, उनके बारे में साइकोलॉजी क्या कहती है.
हर व्यक्ति के पोस्ट करने की वजह अलग होती है
आज के समय में शायद ही कोई ऐसा होगा जो सोशल मीडिया का इस्तेमाल न करता हो. सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, लाखों लोग अपनी जिंदगी के छोटे-बड़े पल फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप या एक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर शेयर करते रहते हैं. किसी ने नई कार खरीदी, किसी ने होटल में खाना खाया, कोई घूमने गया, तो किसी ने सिर्फ चाय का कप भी पोस्ट कर दिया. कई लोग तो अपनी हर छोटी-बड़ी चीजें सोशल मीडिया पर डाल देते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जो लोग हर चीज सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं, वे कैसे होते हैं? क्या उन्हें सिर्फ लाइक्स और कमेंट्स पसंद होते हैं, या इसके पीछे इंसानी व्यवहार से जुड़ी कोई गहरी वजह भी होती है?
साइकोलॉजिस्ट कहती हैं कि हर व्यक्ति का स्वभाव अलग होता है और सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की वजह भी अलग-अलग हो सकती है. कुछ लोग अपनी खुशियां दूसरों के साथ बांटना पसंद करते हैं. उन्हें लगता है कि जिंदगी के अच्छे पल यादगार बन जाने चाहिए. वहीं कुछ लोग इसलिए पोस्ट करते हैं क्योंकि उन्हें अपने दोस्तों और परिवार से जुड़े रहना अच्छा लगता है. उनके लिए सोशल मीडिया सिर्फ एक डिजिटल फोटो एल्बम की तरह होता है, जहां वे अपनी यादों को संभालकर रखते हैं.
लाइक्स और कमेंट्स का भी पड़ता है असर
लेकिन कुछ मामलों में इसकी वजह मनोविज्ञान से भी जुड़ी होती है. जब किसी पोस्ट पर ज्यादा लाइक्स, कमेंट्स या तारीफ मिलती है, तो व्यक्ति को अच्छा महसूस होता है. यही कारण है कि कई लोग बार-बार कुछ नया पोस्ट करने लगते हैं. यह जरूरी नहीं कि ऐसा हर व्यक्ति सिर्फ दिखावा करने के लिए करता हो. कई बार यह सिर्फ लोगों से जुड़ाव महसूस करने का तरीका भी होता है. मनोवैज्ञानिक भी मानते हैं कि सोशल मीडिया पर लगातार अपनी जिंदगी शेयर करने वाले सभी लोगों को एक ही नजर से नहीं देखा जा सकता. कुछ लोग बेहद मिलनसार होते हैं और अपनी बातें खुलकर कहना पसंद करते हैं. वहीं कुछ लोग अपनी उपलब्धियों को शेयर करके प्रेरणा देना चाहते हैं. कई लोग अपने सफर, काम या अनुभव इसलिए पोस्ट करते हैं ताकि दूसरे लोग भी उनसे कुछ सीख सकें.
जब यह आदत परेशानी बनने लगे
हालांकि, जब कोई व्यक्ति हर छोटी-बड़ी बात सिर्फ लोगों का ध्यान पाने के लिए पोस्ट करने लगे, तब यह आदत परेशानी का कारण भी बन सकती है. अगर किसी की खुशी इस बात पर निर्भर करने लगे कि उसकी पोस्ट पर कितने लाइक्स आए या कितने लोगों ने तारीफ की, तो धीरे-धीरे उसका आत्मविश्वास दूसरों की प्रतिक्रिया पर टिकने लगता है. ऐसे लोग कई बार बिना वजह भी अपनी जिंदगी की निजी बातें इंटरनेट पर शेयर कर देते हैं, जिसका असर बाद में उनकी प्राइवेसी पर पड़ सकता है.
दिलचस्प बात यह है कि कुछ रिसर्च में यह भी पाया गया है कि सोशल मीडिया पर ज्यादा एक्टिव रहने वाले लोगों के पीछे सिर्फ एक कारण नहीं होता. कोई अपनी पहचान बनाना चाहता है, कोई अपने काम का प्रचार करता है, कोई अपने परिवार से जुड़ा रहना चाहता है, तो कोई सिर्फ अपनी यादों को संजोना चाहता है. यानी हर बार ज्यादा पोस्ट करना किसी निगेटिव स्वभाव की निशानी नहीं होता.
सोशल मीडिया अब सिर्फ मनोरंजन नहीं रहा
इसके साथ ही एक और बात समझना जरूरी है. आज सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं रह गया है. यह लोगों के लिए करियर, बिजनेस और कमाई का भी बड़ा माध्यम बन चुका है. कंटेंट क्रिएटर, ट्रैवल ब्लॉगर, फूड व्लॉगर, शिक्षक, डॉक्टर और छोटे कारोबारी भी नियमित पोस्ट करते हैं, क्योंकि यही उनके काम का हिस्सा है. इसलिए किसी व्यक्ति को सिर्फ उसकी पोस्ट देखकर जज करना सही नहीं होगा.
सबसे जरूरी बात संतुलन की है. अगर सोशल मीडिया का इस्तेमाल खुशी बांटने, सीखने, दूसरों से जुड़ने और यादों को संभालने के लिए किया जाए, तो इसमें कोई बुराई नहीं है. लेकिन अगर पूरी जिंदगी सिर्फ लाइक्स, कमेंट्स और लोगों की तारीफ के भरोसे चलने लगे, तो यह मानसिक तनाव की वजह भी बन सकता है. इसलिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करें, लेकिन इस तरह कि वह आपकी जिंदगी का हिस्सा रहे, पूरी जिंदगी न बन जाए. आखिर असली खुशी स्क्रीन पर नहीं, बल्कि उन पलों को जीने में होती है जिन्हें बाद में तस्वीरों में कैद किया जाता है.
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