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संविधान पर RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबले के बयान को लेकर देश में बयानबाजी जारी है. इस बीच अब बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने एक बार फिर केंद्र सरकार और विपक्षी दल कांग्रेस दोनों पर तीखा हमला बोला है. एक प्रेस वार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि देश के करोड़ों वंचितों और दलितों के लिए बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान को कांग्रेस और भाजपा दोनों ने कभी भी ईमानदारी से लागू नहीं किया.
मायावती ने कहा, “देश के पूरे समाज के कल्याण और भलाई के लिए बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भारत को संविधान दिया. लेकिन कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए और अब भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए सरकार भी, दोनों ने इसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से लागू नहीं किया.”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इन दोनों ही पार्टियों ने समय-समय पर अपने राजनीतिक हितों, विचारधाराओं और नीतियों के अनुसार संविधान में अनावश्यक बदलाव किए हैं. उन्होंने कहा, “अक्सर देखा गया है कि कांग्रेस और बीजेपी आपस में मिलीभगत करके संविधान के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ करते हैं.”
होसबले ने क्या कहा था?
बता दें कि आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबले ने आह्वान किया है कि इस मुद्दे पर राष्ट्रीय बहस होनी चाहिए कि ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘समाजवादी’ शब्दों को संविधान की प्रस्तावना में रहना चाहिए या नहीं. उन्होंने इसे ‘राजनीतिक अवसरवाद’ और संविधान की आत्मा पर ‘जानबूझकर किया गया हमला’ करार दिया. हालांकि, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने उनके इस बयान की आलोचना की है. आपातकाल (1975-77) के दौरान संविधान की प्रस्तावना में शामिल किए गए दो शब्दों की समीक्षा के लिए होसबले की जोरदार वकालत ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है.
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