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AMU Protest: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (JNMC) में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर्स विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. डॉक्टरों का कहना है कि वे पिछले 10 साल से अपना काम बखूबी तरीके से कर रहे हैं, इसके बावजूद उनका प्रमोशन नहीं हुआ है. डॉक्टर्स डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेसन (DACP) स्कीम लागू करने की मांग कर रहे हैं, जिसकी मंजूरी सरकार पहले ही दे चुकी है.
एएमयू के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर्स का पिछले 10 साल से प्रमोशन नहीं हुआ है और वे अब भी असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर काम कर रहे हैं. बार-बार प्रमोशन की गुजारिश करने बाद जब कोई हल नहीं निकला तो डॉक्टरों ने प्रशासनिक ब्लॉक में शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन किया और DACP स्कीम जल्द से जल्द लागू करने की मांग की.
जियाउद्दीन डेंटल कॉलेज में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर्स आज यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक भवन रजिस्टार ऑफिस पर पैदल आए और हाथों में पोस्टर-बैनर लेकर विरोध प्रदर्शन किया. उन्होंने विरोध प्रदर्शन करते हुए अपनी मांग से संबंधित चीजे यूनिवर्सिटी इंतजामिया को बताई.
बीते 10 साल से डॉक्टर्स को दिया जा रहा झूठा भरोसा
प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर वह पिछले दस साल से कर कार्य कर रहे हैं, लेकिन उनका प्रमोशन नहीं हो पा रहा है. जब प्रमोशन की बात आती है तब यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से हमें केवल इंतजार करने के लिए कहा जाता है. बाद में वह उससे पीछे हट जाते हैं. हमारे एरियर और सैलरी कुछ भी नहीं बढ़ पा रहा है.
क्या है DACP योजना?
डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन यानी डीएसीपी वह योजना है, जिसे केंद्र सरकार ने डॉक्टर्स के लिए करियर की प्रगति, वित्तीय लाभ सुनिश्चित करने और पदोन्नति व रैंक में असमानताओं को खत्म करने के लिए शुरू की थी. इसे यूजीसी ने 2008 में लागू किया था. इस योजना के तहत डॉक्टर्स की सेवा अवधि में चार बार प्रमोशन या वित्तीय उन्नयन सुनिश्चित करना है.
DU, BHU जैसे बड़े मेडिकल संस्थानों में पहले से लागू
डीएसीपी योजना भारत के कई प्रमुख मेडिकल संस्थानों, जैसे दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में पहले से लागू हो चुकी है. डीयू ने इसे 2013 में और बीएचयू ने 2015 में लागू किया था. हालांकि साल 2018 में एएमयू के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में इसे लागू करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन 6 साल बाद भी इसे लागू नहीं किया गया है.एएमयू के डॉक्टरों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की अनावश्यक देरी और उदासीनता के कारण इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है.
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