Baruipur Rape and Murder Case और Sriganganagar Rape Case में सख्त Action ने Criminals के मन में जरूर खौफ पैदा किया होगा – Prabhasakshi

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पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के राज में आरजी कर अस्पताल में बलात्कार और हत्या मामले में भले कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई हो, भले ममता के राज में संदेशखाली मामले के आरोपियों के खिलाफ बड़ा एक्शन नहीं लिया गया हो लेकिन राज्य में सत्ता बदलते ही महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों पर शिकंजा कस चुका है। बात सिर्फ पश्चिम बंगाल की भी नहीं है, राजस्थान में भी भाजपा सरकार महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त एक्शन ले रही है। यह भी कहा जा सकता है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के मामले में हर भाजपा शासित राज्य सरकार योगी मॉडल अपना चुकी है।

हम आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में 11 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या तथा राजस्थान के श्रीगंगानगर में तेरह वर्ष की नाबालिग से कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। लेकिन दोनों ही मामलों में जिस तरह से त्वरित पुलिसिया कार्रवाई की गयी है उसने यह भरोसा भी जगाया है कि महिलाओं के साथ बर्बरता या दुष्कर्म जैसी घटनाएं कतई स्वीकार नहीं की जायेंगी।

जहां तक पश्चिम बंगाल का मामला है तो आपको बता दें कि दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में ग्यारह वर्ष की बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या ने राज्य की कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया था। बच्ची का शव बोरे में बंद कर तालाब में फेंका गया था। चिकित्सकीय जांच में दुष्कर्म की पुष्टि हुई और यह भी सामने आया कि बच्ची के फेफड़ों में पानी था, जिससे संकेत मिला कि उसे जीवित अवस्था में पानी में फेंका गया। पुलिस ने हत्या, सामूहिक दुष्कर्म तथा बाल संरक्षण कानून की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर विशेष जांच दल का गठन किया। जांच के दौरान सीसीटीवी चित्रों से महत्वपूर्ण सुराग मिला, जिसमें मुख्य आरोपी प्रभास मंडल बच्ची के साथ दिखाई दिया। इसके बाद कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और फरार आरोपी कबीर मोल्ला को भी बाद में पकड़ लिया गया।

जांच के दौरान पुलिस मुख्य आरोपी प्रभास मंडल को घटनास्थल पर अपराध की कड़ियां जोड़ने के लिए लेकर गई। पुलिस के अनुसार उसने एक जवान की सरकारी पिस्तौल छीन ली, पुलिस दल पर गोली चलाई और भागने का प्रयास किया। जवाबी कार्रवाई में वह घायल हुआ और अस्पताल ले जाने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया। इस मुठभेड़ के बाद राज्य की राजनीति में तीखी बहस शुरू हो गई। भाजपा ने इसे दैवीय न्याय बताया, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने इसे जंगल राज करार देते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। वरिष्ठ नेताओं के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर चलता रहा और यह मुठभेड़ पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई।

इस पूरे मामले का एक मानवीय पक्ष भी सामने आया। प्रभास मंडल की मां ने कहा कि उनके बेटे को उसके अपराध की सजा मिली है और उन्होंने यहां तक कहा कि वह उसके शव को भी नहीं देखना चाहतीं। दूसरी ओर पीड़ित परिवार ने पुलिस जांच की प्रगति पर संतोष जताया और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग रखी। राज्य सरकार ने यह भी कहा कि यदि बच्ची की गुमशुदगी की शिकायत के बाद पुलिस की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी।

उधर, बारुईपुर प्रकरण के बाद भाजपा ने कामदुनी कांड का मुद्दा भी फिर उठाया और कहा कि पुराने मामलों में भी पीड़ितों को पूरा न्याय मिलना चाहिए। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि अब अपराधियों के प्रति किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। दूसरी ओर विपक्ष ने पुलिस मुठभेड़ की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे कानून व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया के लिए चुनौती बताया। इस तरह बारुईपुर केवल एक आपराधिक घटना नहीं रही, बल्कि कानून व्यवस्था, न्याय और राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन गई।

इसी बीच, राजस्थान के श्रीगंगानगर में तेरह वर्ष की नाबालिग से कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में भी पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। इस मामले में एक और आरोपी प्रकाश नायक की गिरफ्तारी के साथ कुल उन्नीस लोगों को पकड़ा जा चुका है। इन लोगों को जब पकड़ कर ले जाया जा रहा था तो जिस तरह उनकी लोगों द्वारा पिटाई का वीडियो वायरल हुआ उसने अपराधियों के मन में जरूर खौफ पैदा किया होगा। पुलिस के अनुसार अभी तीन से चार अन्य आरोपियों, जिनमें एक होटल प्रबंधक और कुछ ग्राहक भी शामिल हैं, उनकी तलाश जारी है। जांच में सामने आया कि गिरफ्तार लोगों में बारह से तेरह व्यक्तियों पर नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने का आरोप है। इनमें एक युवक वह भी बताया गया जिससे पीड़िता की पहचान सोशल मीडिया के जरिये हुई थी।

हम आपको यह भी बता दें कि राजस्थान पुलिस ने केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि पीड़िता से जुड़े नाम पर फैलाए जा रहे फर्जी चित्रों और भ्रामक सामग्री पर भी शिकंजा कस दिया। जांच में स्पष्ट हुआ कि प्रसारित किए जा रहे दोनों चित्र इस मामले से संबंधित नहीं थे, बल्कि दूसरे राज्य की एक अलग घटना के थे। पुलिस ने मामला दर्ज कर संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए और भ्रामक सामग्री फैलाने वालों की पहचान शुरू कर दी। साथ ही जिन होटलों में वारदात हुई, उनसे दस्तावेज मांगे गए और जांच को आगे बढ़ाया गया। यही नहीं आरोपियों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई की खबरें भी सामने आई हैं।

बहरहाल, बारुईपुर और श्रीगंगानगर की घटनाएं एक बार फिर यह याद दिलाती हैं कि महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ जघन्य अपराध पूरे समाज के लिए गंभीर चुनौती हैं। देश की आधी आबादी के खिलाफ अमानवीय व्यवहार करने वालों को कड़े से कड़ा दंड देकर ही अपराधियों के मन में खौफ पैदा किया जा सकता है। बहरहाल, इन दोनों मामलों ने महिलाओं की सुरक्षा को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में एक बार फिर से ला खड़ा किया है।

-नीरज कुमार दुबे

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