स्थानीय हलवासिया विद्या विहार के प्राथमिक विभाग में कक्षा तीसरी से पॉचवी तक के छात्रों के लिए कविता पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आरंभ मां सरस्वती की वंदना से हुआ। तत्पश्चात छात्रों द्वारा ज्वलंत मुद्दों जैसे सिंदूर की कीमत, युग रचो, किसान युद्ध, भारत, आत्मविश्वास, देशभक्ति, नारी शक्ति तथा प्रकृति जैसे विषयों पर कविताओं का वाचन किया गया।
आचार्य दानवीर राणा और आचार्या पूजा शर्मा ने निर्णायक मंडल के रूप में भूमिका निभाई। आचार्या अंजुला वर्मा द्वारा मंच संचालन किया गया।
कक्षा तीसरी से एकांश प्रथम, लावण्या द्वितीय और प्रोत्साहन पुरस्कार आर्यन ने प्राप्त किया। कक्षा चतुर्थ से समर प्रथम, भव्यम भारद्वाज द्वितीय और प्रोत्साहन पुरस्कार मीतांशी ने प्राप्त किया। कक्षा पंचम से अर्णव प्रथम, ललित द्वितीय और अवनी ने प्रोत्साहन पुरस्कार प्राप्त किया। अंत में विजेता प्रतिभागियों को ट्रॉफी व सभी प्रतिभागियों को प्रतिभागिता पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। प्रशासक डॉ. शमशेर सिंह अहलावत ने सभी छात्रों को शुभकामनाएं प्रेषित की। प्राचार्य विमलेश आर्य ने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में आत्मविश्वास विकसित करती है।
दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से ‘द ट्रिब्यून’ का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है।
‘द ट्रिब्यून’ के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।