Bollywood Mythology: ‘कर्मों का फल यहीं मिलेगा’… फिल्मों में विलेन हारता ही क्यों है, महाभारत से जुड़ा है कने – India.Com

Edited by: Pooja Batra | Updated: May 27, 2026, 1:41 PM
'जो किया है भुगतना तो पड़ेगा', ये डायलॉग आपने हिंदी फिल्मों में अधिकतर सुना होगा. फिर वो दौर 70 के एंग्री यंग मैन का रहा हो, 90s की फिल्मी ड्रामा हो या फिर आज की मसाला फिल्में, विलेन कितना भी ताकतवर हो, हारता जरूर है. दरअसल, बॉलीवुड का ये फॉर्मूला सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिहाज़ से नहीं बना बल्कि इसका महाभारत, गीता और पौराणिक सोच से गहरा नाता रहा है. जानते हैं कैसे?
भारतीय दर्शक फिल्म को सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिहाज़ से नहीं देखता. इसके पीछे एक धारणा काम करती है. जो हमारे, इतिहास, संस्कार, परिवेश, समाज और परिवार से आती है. हमारा दिमाग और हमारी आंखें हर चीज़ में न्याय ढूंढती हैं. अगर किसी फिल्म में विलने जीत जाता है तो ऑडियंस को एक अधूरापन सा महसूस होता है. लेकिन वहीं अगर हीरो दर्द और संघर्ष में जीत जाता है तो दर्शक बहुत खुश होते हैं. ये सोच हमारे धार्मिक कार्यों और पुराणों से आई हैं.
महाभारत का युद्ध धर्म और अधर्म की सबसे बड़ी लड़ाई मानी जाती है. जिसमें दिखाया है कि कौरवों के पास ताकत, सेना और सत्ता सब कुछ था लेकिन फिर भी जीत पांडवों की हुई थी. ऐसे ही अगर फिल्म शोले की बात करें तो डाकू गब्बर सिंह का आतंक पूरी फिल्म में दिखाई देता है लेकिन अंत में उसका हारना लोगों को खुश कर देता है. ठीक वैसे ही जैसे महाभारत में दुर्योधन के पतन के बाद धर्म की जीत दिखाई देती है.
फिल्म का विलेन मोगैंबो बहुत ताकतवर दिखाया गया है, लेकिन अहंकार तो किसी का भी टिकता है. यही अहंकार उसकी हार का कारण बनता है, पौराणिक कथाओं के अनुसार भी रावण का अहंकार ही उसे ले डूबता है.
अमिताभ बच्चन स्टारर इस फिल्म में दीनानाथ चौहान की अधर्म के खिलाफ लड़ाई एक बार फिर पुराणों की याद दिलाती है जिसमें कहा गया है कि इंसान अपने कर्मों से नहीं बच सकता है. अच्छे कर्मों का अच्छा और बुरे कर्मों का बुरा फल मिलना तय है.
फिल्म की कहानी पुनर्जन्म पर आधारित है. जिसमें विलेन से बदला लेने के लिए करण-अर्जुन दोबारा जन्म लेते है और अंत में विलेन दुर्जन सिंह का खात्मा होता है और उसे अपने कर्मों की सजा मिलती है.
हॉलीवुड फिल्मों की बात करें तो उसमें फिर भी कई बार विलेन या फिर ग्रे किरदार की जीत होती है लेकिन हिंदी फिल्मों की बात करें तो यहां नैतिकता लंबे समय तक टिका रहता है. इसकी सबसे बड़ी वजह हमारी संस्कृति और पौराणिक कथाओं का असर है.
जब फिल्म में विलेन हारता है, तो दर्शक तालियां बजाते हैं. उन्हें लगता है कि हीरो के साथ न्याय हुआ है. यही वजह है कि बॉलीवुड का यह डायलॉग आज भी लोगों को पसंद आता है-'ऊपर वाला देर करता है… लेकिन अंधेर नहीं.'
Subscribe to Our Newsletter Today!
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.
© 1998-2026 INDIADOTCOM DIGITAL PRIVATE LIMITED, ALL RIGHTS RESERVED

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News