Shubham Raja
Date: 26-09-26 23:45
UN Reform BRICS: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा है कि BRICS और संयुक्त राष्ट्र को एक-दूसरे के विरोधी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. उनके मुताबिक, देशों के सामने BRICS या UN में से किसी एक को चुनने का सवाल खड़ा करना सही नहीं है. उन्होंने कहा कि छोटे समूह भी संयुक्त राष्ट्र का समर्थन करते हैं और उसमें सुधार चाहते हैं. UN में कुछ कमियां जरूर हैं, लेकिन इस संस्था ने कई महत्वपूर्ण काम भी किए हैं, इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.
न्यूयॉर्क में गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान एक चर्चा में शामिल हुए जयशंकर ने कहा कि BRICS और UN को प्रतिद्वंद्वी मानने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि BRICS संयुक्त राष्ट्र का समर्थन करता है और इसके कई सदस्य UN में सुधार की मांग को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं.
‘UN में सुधार का मतलब उसका विरोध नहीं’
जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में बदलाव की मांग इसलिए उठ रही है क्योंकि यह संस्था आज की दुनिया के मुकाबले पुरानी व्यवस्था में काम कर रही है. उन्होंने साफ किया कि UN में सुधार की बात करना इस वैश्विक संस्था के खिलाफ होना नहीं है. उनके मुताबिक, जो लोग संयुक्त राष्ट्र को महत्वपूर्ण मानते हैं, वही उसमें जरूरी बदलाव की मांग भी कर रहे हैं.
BRICS और UN पर जयशंकर
‘रप्चर्स एंड रैम्पार्ट्स: बिल्डिंग ब्रिजेस फॉर ए चेंजिंग वर्ल्ड’ कार्यक्रम में जयशंकर ने सितंबर में भारत में हुई BRICS समिट का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि BRICS के प्रमुख विचारों में से एक यह है कि संयुक्त राष्ट्र को अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के केंद्र में रखा जाए. इसलिए इसे BRICS बनाम UN के रूप में देखने की जरूरत नहीं है.
उन्होंने कहा कि BRICS संयुक्त राष्ट्र का समर्थन करता है और समूह के कई देश सुरक्षा परिषद यानी UNSC में सुधार के पक्ष में हैं. जयशंकर के मुताबिक BRICS के एजेंडे में लचीलापन, स्थिरता, इनोवेशन और सहयोग जैसे मुद्दे शामिल हैं और ये UN के लिए भी महत्वपूर्ण हैं.
उन्होंने कहा कि न्यूयॉर्क में UN मुख्यालय के पास आयोजित हाई-लेवल वीक के दौरान यह देखना जरूरी है कि BRICS ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार के लक्ष्य को किस तरह आगे बढ़ाया है. उनके मुताबिक, BRICS ने इस दिशा में काम को और मजबूत किया है.
UNSC में 5 स्थायी सदस्य
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में कुल पांच स्थायी सदस्य हैं. इनमें चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं. इन पांचों देशों के पास वीटो पावर है. इसके अलावा UNSC में 10 अस्थायी सदस्य होते हैं, जिन्हें दो साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है.
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग करता रहा है. भारत का कहना है कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था को आज की दुनिया की वास्तविकता के हिसाब से अधिक प्रतिनिधित्व वाला बनाया जाना चाहिए.
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