Chamoli Cloudburst News Live: चमोली के थराली में फटा बादल, तबाही के बीच गुम 2 लोग, आधी रात को मची चीख-पुकार… – News18 Hindi

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अभिषेक गुप्ता ने बताया कि थराली आपदा में राहत हेतु स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर तैनात कर दी गयी है, जिसका विवरण निम्न प्रकार है.
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली में वर्तमान में
4 चिकित्सा अधिकारी
6 स्टाफ नर्स
1 फार्मासिस्ट
1 ड्राइवर मय एम्बुलेंस, जीवन रक्षक औषधी सहित अलर्ट पर है.
अतिरिक्त 2-108 एम्बुलैंस एवं
2 विशेषज्ञ चिकित्साधिकारी की टीम एसडीएच कर्णप्रयाग से तैनाती की गई है.
अतिरिक्त 1 चिकित्साधिकारी पीएचसी देवाल से तैनाती की गई है.
थराली में आई तबाही के बाद एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीम्स मौके पर पहुंच गई है और लगातार सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं.
उत्तराखंड में इस मॉनसून सीजन के दौरान कई बड़े बादल फटने की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है. सबसे गंभीर घटना 5 अगस्त 2025 को उत्तरकाशी के धराली और हर्षिल क्षेत्रों में हुई. उत्तरकाशी में बादल फटने से आई अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने धराली और हर्षिल इलाके को तहस-नहस कर दिया. कई घर, होटल और इंफ्रास्ट्रक्चर पानी में बह गए. इस हादसे में कम से कम चार लोगों की मौत हुई, जबकि दर्जनों लोग लापता हुए. सुखी और बगोरी समेत कई गांव प्रभावित हुए, जहां घरों और कृषि संपत्तियों को भारी नुकसान हुआ. वही रुद्रप्रयाग में जुलाई के आखिर में केदारघाटी क्षेत्र में बादल फटने से आई बाढ़ ने यहां भी कहर बरपाया. कई घर और गाड़ियां मलबे में दब गई और नदियां उफान पर आ गई.
चेपड़ों गांव में बादल फटने से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, जहां एक बुजुर्ग व्यक्ति के लापता होने की खबर है. वही सगवाड़ा गांव में एक 20 वर्षीय युवती के मलबे में दबे होने की जानकारी है. मीडिया रिपोर्ट की माने तो अबतक कुल 3 लोग लापता है. दुकानों और घरों में मलबा घुस गया है, जिससे लाखों का नुकसान हुआ है. राड़ीबगड़ में उपजिलाधिकारी आवास, नगर पंचायत अध्यक्ष के आवास और कई अन्य घरों को भी भारी क्षति पहुंची है.
जिला प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए थराली तहसील के सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को शनिवार (23 अगस्त 2025) के लिए बंद रखने का आदेश दिया है. जिलाधिकारी डॉक्टर संदीप तिवारी ने बताया कि पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार मौके पर मौजूद हैं.
गौचर से स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF) की टीम घटनास्थल पर है. बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) की टीम मिंग्गदेरा के पास सड़क खोलने की कोशिशों में जुटी है, ताकि यातायात और राहत कार्यों को जल्द सुचारू किया जा सके. प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए हैं.
आज तीनों विकासखंडों थराली, देवाल और नारायणबगड़ के सभी स्कूलों में भारी बारिश को देखते हुए अवकाश घोषित कर दिया गया है.
सागवाड़ा गांव में एक व्यक्ति के मलबे में दबने की सूचना है. जबकि इसी गांव में 20 वर्षीय लड़की की मलबे में दबे होने की जानकारी मिल रही है. सूचना मिलने के बाद एसडीआरएफ की टीम गौचर से घटना स्थल के लिए रवाना हो गई है.
थराली के तहसील परिसर राड़ीबगड़ में एक बरसाती गदेरा अचानक उफान पर आ गया. एसडीएम आवास मलबे से दब गया. एसडीएम समेत अन्य ने रात में ही आवास छोड़ दिया और सुरक्षित जगह पर चले गए. राड़ीबगड़ में गाड़ियों के मलबे में दबने की सूचना है. वहीं कहा जा रहा है कि तीन लोग लापता है. हालांकि अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने बादल फटने की घटना पर दुख जताया है. उन्होंने कहा कि जनपद चमोली के थराली क्षेत्र में देर रात बादल फटने की दुःखद सूचना प्राप्त हुई है. जिला प्रशासन, एसडीआरएफ, पुलिस मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं. इस संबंध में निरंतर स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हूं और स्वयं स्थिति की गहन निगरानी कर रहा हूं. ईश्वर से सभी के सकुशल होने की प्रार्थना करता हूं
धराली में आई बाढ़ के बाद अब थराली में बादल फटने की इस घटना ने स्थानीय लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. आर्थिक नुकसान का आकलन अभी बाकी है, लेकिन प्राथमिक जानकारी के मुताबिक मकानों, दुकानों और गाड़ियों को भारी क्षति पहुंची है. फिलहाल राहत और बचाव कार्य जारी है और प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है.
भारी बारिश के चलते पिंडर और प्राणमती नदियां उफान पर हैं. इससे खतरा और बढ़ गया है. सड़कों पर जगह-जगह मलबा जमा होने से यातायात पूरी तरह से ठप हो गया है. प्रशासन ने तत्काल मशीनरी और राहत दलों को भेजा है, ताकि बंद रास्तों को खोला जा सके और फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके.
सूचना के अनुसार सगवाड़ा गांव का एक व्यक्ति लापता है, जिसकी तलाश की जा रही है. प्रशासन, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें राहत एवं बचाव कार्य के लिए मौके पर पहुंच गई हैं. देर रात हुई इस घटना के बाद लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हुए. बताया जा रहा है कि इस आपदा में जल संस्थान का दफ्तर भी क्षतिग्रस्त हो गया है.

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