Crude oil Price: गुरुवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल 103 डॉलर प्रति बैरल पर फिसल चुका था. क्रूड की कीमत 2 फीसदी गिरावट के साथ लाल निशान पर कारोबार कर रहा था. तेल में बिकवाली देखी जा रही थी. जैसे ही घड़ी की सूई 5 बजे पर गई अचानक तेल के दाम में भयंकर तेजी लौटने लगी.
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Crude Oil Price Hike: अमेरिका और ईरान के बीच बात बनती नहीं दिख रही है. अमेरिका दावा कर रहा है कि ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत चल रही है, वहीं ईरान ने जिद ठान रखी है कि वो यूरेनियम को देश से बाहर नहीं जाने देगा. अमेरिका-ईरान के टशन ने तेल की चाल बिगाड़ रखी है. कच्चे तेल की दाम एक बयान से पलट जाते हैं. बुधवार 20 मई को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल सप्लाई बहाल करने की बात कही तो कच्चे तेल के दाम में सीधे 5% की गिरावट आ गई. गुरुवार शाम होते-होते ईरान की ओर से एक ऐसा बयान आया, जिसने तेल के दाम में फिर से भूचाल ला दिया है.
क्यों अचानक तेल के दाम में आई तेजी
गुरुवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल 103 डॉलर प्रति बैरल पर फिसल चुका था. क्रूड की कीमत 2 फीसदी गिरावट के साथ लाल निशान पर कारोबार कर रहा था. तेल में बिकवाली देखी जा रही थी. जैसे ही घड़ी की सूई 5 बजे पर गई अचानक तेल के दाम में भयंकर तेजी लौटने लगी. कच्चा तेल 103 डॉलर से सीधे 108.26 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. ब्रेंट क्रूड में 3.06 फीसदी से अधिक का उछाल आया, WTI 3.68 फीसदी की तेजी के साथ 101.88 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.
क्यों अचानक कच्चे तेल में आई तेजी ?
कल तक ट्रंप दावा कर रहे थे कि होर्मुज जल्द खुलेगा, लेकिन ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने साफ कर दिया है कि हाई एनरिच्ड यूरेनियम को देश से बाहर नहीं जाने देंगे. ये बयान सीधे अमेरिका-इजरायल को चुनौती है. ईरान को डर है कि अगर उसने यूरेनियम बाहर भेज दिया, तो भविष्य के लिए और कमजोर हो जाएगा. वहीं अमेरिका साफ कर चुका है कि अगर ईरान के साथ समझौता नहीं हुआ तो हमले फिर से शुरू हो जाएंगे. सिर्फ युद्ध फिर से शुरू होने का डर नहीं बल्कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने की उम्मीद खत्म हो गई है. अगर यु्द्ध फिर से भड़का तो तेल की कीमतों में और तेजी आएगी. दुनिया के सबसे अहम ऑयल सप्लाई रूट्स के बंद रहने से तेल की कीमतें बढ़ रही है.
भारत के लिए क्या है खतरा
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारत की मुश्किल बढ़ेगी. भारत में पहले ही पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ चुके हैं. कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ी तो तेल कंपनियों का नुकसान बढ़ेगा, जिसकी वजह से लागत का बोझ आम जनता पर पड़ सकता है. यानी आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. भारत की तेल कंपनियां पहले से 1000 करोड़ रुपये रोजाना का नुकसान झेल रही है. अगर कच्चे तेल के दाम और बढ़े तो मुश्किल बढ़नी तय है.
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बवीता झा
Zee News Hindi ( Digital) में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत. बिजनेस जगत की खबरों की पेचीदगियों को सरल भाषा में लिखना और अपने पाठकों से कनेक्ट करने में खास रूचि. ग्लोबल ट्रेड, शेयर बाज…और पढ़ें
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