Explainer: चीन क्यों कर रहा ह्यूमनॉइड में इतना निवेश? अमेरिका-भारत कहां है इस दौड़ में? – India.com

Humanoid Robots: चीन का ह्यूमनॉइड रोबोट उद्योग काफी तेजी से बढ़ रहा है. रोबोटिक्स कंपनियां फैक्ट्री, लॉजिस्टिक्स, घरों और अन्य कामों के लिए रोबोट बना रही हैं. चीन की प्रमुख रोबोटिक्स कंपनियों में से एक, Unitree अब IPO लाने की तैयारी कर रही है. आइये जानते हैं कि चीन ह्यूमनॉइड रोबोट में इतना भारी निवेश क्यों कर रहा है? इस रेस में भारत और अमेरिका कहां हैं?

गवडॉटसीएन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ह्यूमनॉइड रोबोट को AI और फिजिकल मैन्युफैक्चरिंग को जोड़ने, इंडस्ट्रियल प्रोडक्टिविटी बढ़ाने और भविष्य के स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजी सेक्टर में लीडरशिप हासिल करने के एक तरीके के तौर पर देखता है. चीन चाहता है कि ह्यूमनॉइड रोबोट मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और दूसरे फिजिकल काम करें, जिससे एफिशिएंसी बढ़े और लागत कम हो.

चीन के पास पहले से ही एक बड़ा रोबोटिक्स इकोसिस्टम और सप्लाई चेन है, जो उसे ह्यूमनॉइड रोबोट विकसित करने और बड़े पैमाने पर उनका उत्पादन करने का आधार देता है. चीन की सरकारी पहलों का मकसद R&D की लागत कम करना, इस्तेमाल के दायरे को बढ़ाना और ह्यूमनॉइड रोबोट को वास्तविक अर्थव्यवस्था में शामिल करना है.

(photo credit, AI, for representation only)
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कम लागत में रोबोट बनाना, ह्यूमनॉइड और क्वाड्रुपेड (चार पैरों वाले) प्लेटफॉर्म बनाना यूनिट्री की खासियत है. यूनिट्री ने अपेक्षाकृत सस्ते क्वाड्रुपेड रोबोट बनाकर अपनी पहचान बनाई और इसी नज़रिए को G1 और R1 जैसे ह्यूमनॉइड रोबोट में भी अपनाया है. यूनिट्री के पास क्वाड्रुपेड और ह्यूमनॉइड रोबोट दोनों का अनुभव है, जिससे उसके पास रोबोटिक्स उत्पादों का एक व्यापक आधार है.

यूनिट्री ने 2025 में लगभग 1.7 बिलियन युआन का रेवेन्यू कमाया, जिसमें ह्यूमनॉइड रोबोट का बड़ा हिस्सा था. इससे पता चलता है कि उसके उत्पाद सिर्फ़ प्रदर्शन से आगे बढ़कर बिक्री के स्तर पर पहुँच चुके हैं. 2026 में शंघाई में होने वाले IPO का मकसद रोबोट डेवलपमेंट, नए प्रोडक्ट लॉन्च और मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने के लिए लगभग 6.1 बिलियन युआन जुटाना है. UBTech और AgiBot जैसी कंपनियां भी ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स के क्षेत्र में मुकाबला कर रही हैं.
ह्यूमनॉइड रोबोट पायलट प्रोजेक्ट्स से निकलकर शुरुआती कमर्शियल इस्तेमाल के दौर में पहुंच रहे हैं. खासकर मैन्युफैक्चरिंग में; लेकिन बड़े पैमाने पर और पूरी तरह से ऑटोमैटिक तरीके से औद्योगिक इस्तेमाल अभी भी काफी दूर है. आने वाले कुछ साल यह तय करेंगे कि क्या वे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए ज़रूरी भरोसेमंदता और किफायती लागत हासिल कर पाते हैं या नहीं.
अभी इनका कमर्शियल इस्तेमाल असेंबली, मटीरियल हैंडलिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे नियंत्रित कामों तक ही सीमित है, न कि पूरी तरह से ऑटोमैटिक, सामान्य-उद्देश्य वाले फ़ैक्टरी के कामों में.
टेस्ला और अमेरिकी कंपनियों के पास बड़ी ताकतें हैं. टेस्ला के पास अपने व्यापक टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम के जरिए AI, ऑटोनॉमस सिस्टम, सॉफ्टवेयर और बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग में काफी महारत है. इसलिए, असली मुकाबला सिर्फ़ रोबोट बनाने तक सीमित नहीं होगा, बल्कि यह AI इंटेलिजेंस, ऑटोनॉमी, भरोसेमंदता और असल दुनिया में परफॉर्मेंस पर भी निर्भर करेगा.
भारत एक उभरता हुआ खिलाड़ी है, लेकिन चीन और अमेरिका की तुलना में यह अभी शुरुआती चरण में है. पीआईबी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार रोबोटिक्स पर एक राष्ट्रीय रणनीति विकसित कर रही है, जिसमें स्वदेशी रोबोटिक्स और फिजिकल AI पर ध्यान दिया जा रहा है.
भारत को अभी भी एक्चुएटर्स, सेंसर्स, प्रिसिजन गियर्स, चिपसेट्स और रोबोटिक्स के अन्य अहम पार्ट्स के मामले में अपनी घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने की जरूरत है. भारत मैन्युफैक्चरिंग के पैमाने, कमर्शियल इस्तेमाल और इकोसिस्टम के मामले में वह अभी चीन और अमेरिका से पीछे है.

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Vineet Sharan Srivastava एक भारतीय पत्रकार और डिजिटल न्यूज एक्सपर्ट हैं, जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में 17 वर्षों का अनुभव है. वह असिस्टेंट न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं … और पढ़ें
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