अमेरिका पर कर्ज का बोझ बढ़ने की खबरें बीते कुछ समय में सुर्खियां रही हैं, लेकिन सिर्फ US ही नहीं, बल्कि कई दूसरे अमीर देश में कर्ज के जाल में ऐसे उलझते जा रहे हैं कि उनकी इकोनॉमी पर बड़ा संकट मंडराने लगा है. ऐसा ही हाल है फ्रांस का, जिसे लेकर एक्सपर्ट्स ने बड़ी वॉर्निंग दी है. फ्रांस की उधारी की लागत में लगातार इजाफा होना निवेशकों और तमाम अर्थशास्त्रियों के बीच चिंता की वजह बना हुआ है. देश का 3.5 ट्रिलियन यूरो का सार्वजनिक कर्ज और भी बढ़ सकता है.
‘स्नोबॉल इफेक्ट’ के जोखिम में फ्रांस
अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि फ्रांस का सार्वजनिक कर्ज अगले साल के राष्ट्रपति चुनाव से पहले की राजनीतिक उठापटक राजकोषीय सुधारों की संभावना में गिरावट को देखते हुए और बढ़ता नजर आ रहा है. उन्होंने ‘स्नोबॉल प्रभाव’ (France Snowball Effect) के जोखिम का हवाला दिया है, जिसमें सरकारी बांडों पर भुगतान की जाने वाली औसत ब्याज दर इकोनॉमिक ग्रोथ से अधिक हो जाती है और इससे इकोनॉमी के साइज के सापेक्ष कर्ज में वृद्धि होती है, जब तक कि सरकार लगातार प्राइमरी बजट सरप्लस नहीं रखती है. सीधे शब्दों में समझें, तो ये ऐसी छोटी आर्थिक घटना होती है, जो समय के साथ लगातार बढ़ती जाती है और उसका असर बहुत बड़ा हो जाता है.
GDP का 200% पहुंचेगा कर्ज!
रॉयटर्स की रिपोर्ट को देखें, तो इसमें इकोनॉमिस्ट ने अनुमान जाहिर किया है कि 2027 के राष्ट्रपति चुनावों से पहले फ्रांस पर कर्ज का बोझ तेजी से बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है. इसमें ओईसीडी के महासचिव मैथियास कोरमैन द्वारा बीते सप्ताह पेरिस में दिए गए एक बयान का हवाला दिया गया है कि अगर कुछ नहीं किया गया तो फ्रांस पर 2050 तक सार्वजनिक कर्ज इसकी जीडीपी का 203% तक पहुंच सकता है. 2029 तक ब्याज लागत 100 अरब यूरो के करीब पहुंच सकता है.
क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट सारा कार्लसन भी बीते गुरुवार को कहती नजर आई थीं कि सार्वजनिक कर्ज के सापेक्ष ब्याज भुगतान में बढ़ोतरी फ्रांस के लिए सबसे अधिक होगी. इसके अलावा मॉर्गन स्टेनली ने पिछले शुक्रवार को वित्तीय चिंताओं का हवाला देते हुए अपने ग्राहकों को फ्रांसीसी कर्ज में निवेश कम करने की सलाह दी.
आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें, तो पहली तिमाही में फ्रांस का सार्वजनिक कर्ज 3.5 ट्रिलियन यूरो (4.0 ट्रिलियन डॉलर) से ज्यादा हो गया, जो इसके सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का 117.5% है. कोर्ट डेस कॉम्प्टेस की मानें, तो यह आंकड़ा कोविड-19 संकट (Covid Crisis) के स्तर के करीब है. रिपोर्ट में कहा गया कि फ्रांस यूरो जोन का अकेला ऐसा देश है जिसने कोरोना महामारी के बाद के हाई लेवल से अपने कर्ज का बोझ कम नहीं किया.
ब्याज चुकाने पर हो रहा भारी खर्च
बीते साल 2025 में कर्ज के ब्याज भुगतान का आंकड़ा 66 अरब यूरो तक पहुंच गया, जो देश का सबसे बड़ा खर्च रहा, संभवतः शिक्षा और रक्षा बजट से भी ज्यादा. कोर्ट डेस कॉम्प्टेस ने भी बीते सप्ताह वॉर्निंग दी थी कि यह बिल 2029 तक 100 अरब यूरो तक पहुंच सकता है.
अर्थशास्त्रियों ने कहा कि सैद्धांतिक रूप से फ्रांस मजबूत आर्थिक विकास या प्राथमिक बजट अधिशेष से इस स्थिति को पलट सकता है, लेकिन निकट भविष्य में ये संभव नहीं लगता. कोर्ट डेस कॉम्पटेस की सीनियर ऑफिशियल कैरिन कैम्बी के मुताबिक, अगर हम ऐसा करने में सक्षम नहीं हैं, तो हम सचमुच कर्ज के ब्याज के बोझ तले दबकर दम घुटने का जोखिम उठाएंगे. इस बोझ को कम करने में सालों लग सकते हैं.
इटली का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ये देश बीते दो दशकों में अधिकांश समय तक प्राइमरी सरप्लास हासिल करने के बावजूदअमेरिका और जापान के साथ सबसे अधिक कर्जदार विकसित अर्थव्यवस्थाओं की लिस्ट में एक बना हुआ है.
राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है कर्ज
फ्रांस में अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले बढ़ते कर्ज का बोझ एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बना हुआ है. प्रमुख सेंट्रिस्ट उम्मीदवार एडुआर्ड फिलिप और गैब्रियल अट्टल ने इसे चुनाव अभियानों का केंद्र बनाया है. एक सांसद केविन मौविएक्स ने कहा है कि कर्ज का बढ़ता खतरा बड़ी चेतावनी है और हम जितना अधिक इंतजार करेंगे, परिणाम उतने ही अधिक गंभीर होंगे.
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