Gorakhpur News: जीडीए की जर्जर संपत्तियों का एनबीसीसी करेगा पुनर्विकास – Hindustan

Gorakhpur News: गोरखपुर। राजीव दत्त पाण्डेय गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की वर्षों पुरानी और जर्जर संपत्तियों के दिन अब बहुरने की उम्मीद है। राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) लिमिटेड के माध्यम से इन संपत्तियों का शून्य वित्तीय भार (जीरो फाइनेंशियल बर्डन) मॉडल पर पुनर्विकास कराएगा। जीडीए बोर्ड ने प्रस्ताव को सैद्धांतिक सहमति देते हुए विस्तृत विश्लेषण कर आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

प्राधिकरण की विभिन्न आवासीय और व्यावसायिक योजनाओं में दशकों पहले बनाए गए कई भवन और दुकानें वर्तमान में जर्जर हो चुकी हैं। इनमें बुद्ध विहार पार्ट-सी के वर्ष 2004 में निर्मित 54 ईडब्ल्यूएस भवन, शास्त्रीपुरम शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की 50 दुकानें, सिद्धार्थपुरम शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की 80 दुकानें और वर्ष 2003 में बने बहुउद्देशीय शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की 62 दुकानें शामिल हैं। बुद्ध विहार पार्ट-सी के सभी 54 भवन वर्तमान में खाली हैं और जर्जर होकर कई जगह टूट चुके हैं।

शास्त्रीपुरम में 50 में से 07 दुकानें आवंटित हैं, जबकि 43 खाली हैं। सिद्धार्थपुरम की 80 दुकानों में 68 आवंटित और 12 खाली हैं। बहुउद्देशीय शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बाइपास रोड की 62 दुकानों में 59 आवंटित और 03 खाली हैं। भवन के प्रथम और द्वितीय तल पर वाणिज्य कर विभाग का कार्यालय भी है, जो पिछले वर्ष आगजनी में क्षतिग्रस्त हुआ था। इसका स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जाना है।

एनबीसीसी सर्वे, डिजाइन, निर्माण और विपणन की पूरी लागत आधुनिक एफएआर के इस्तेमाल से निर्मित अतिरिक्त क्षेत्र के मुद्रीकरण से जुटाएगा। पुनर्विकसित परिसर में पुराने आवंटियों को समायोजित करने के बाद एक निर्धारित हिस्सा जीडीए को मिलेगा। शेष निर्मित क्षेत्र को एनबीसीसी खुले बाजार में बेचकर लागत और विकास शुल्क की भरपाई करेगा।

पुनर्विकास पुराने आवंटियों की सहमति के बाद किया जाएगा। जीडीए को स्थल अतिक्रमण मुक्त कर एनबीसीसी को उपलब्ध कराने के साथ जरूरी प्रशासनिक और नियोजन अनुमतियां उपलब्ध कराने तथा वर्तमान आवंटियों के पुनर्वास के लिए दिशा-निर्देश तय करने होंगे। यह प्रक्रिया उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026 के तहत आगे बढ़ाई जाएगी।

-पुराने आवंटियों को समायोजित करने के बाद एक निर्धारित हिस्सा जीडीए को देगा

-शेष निर्मित क्षेत्र को एनबीसीसी खुले बाजार में बेच लागत और विकास शुल्क जुटाएगा

-बुद्ध विहार के 54 ईडब्ल्यूएस भवन समेत पुराने कॉम्प्लेक्स होंगे विकसित

-जर्जर सम्पत्तियों का पुनर्विकास पुराने आवंटियों की सहमति के बाद ही होगा

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