Gorakhpur News: विरासत गलियारे में उजड़ रहे 90% दुकानदारों को नहीं मिलेगा मुआवजा, राजस्व विभाग के फरमान… – Newstrack

Gorakhpur News Today Revenue Department Said No Compensation For the Shops Being Destroyed Heritage Corridor( फोटो – सोशल मीडिया से साभार )
Gorakhpur News in Hindi: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर में विरासत गलियारे के निर्माण को लेकर दुकानों को उजाड़े जाने से व्यपारियों को आक्रोश है। बीते 24 जनवरी को धर्मशाला बाजार से आर्यनगर होते हुए पांडेयहाता तक प्रस्तावित विरासत गलियारा को लेकर प्रस्तावित चौड़ीकरण के विरोध में व्यापारी सड़क पर उतर गए। 25 जनवरी को भी पांडेय हाता के व्यापारियों ने दुकानें बंद रखी। नारा लगाया कि कि विरासत गलियारा में चौड़ीकरण विकास नहीं विनाश है। इसके बाद किराना कमेटी सभागार में पीडब्ल्यूडी और राजस्व विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में व्यापारी संगठनों की बैठक हुई। बैठक में विरासत गलियारा में सी मकान दुकान के कितने हिस्से जा रहे हैं, मकान मालिकों और किरायेदारों को कितना मुआवजा आदि मिलेगा, उसका निर्धारण और गणना किस प्रकार कर रहे हैं, इसकी जानकारी ली।
बातचीत के क्रम में समस्त व्यापार मण्डल के अध्यक्ष नितिन कुमार जायसवाल ने पूछा कि जिनलोगों का खारिज दाखिल नहीं हुआ है, उनको कितना मुआवजा मिलेगा? तब राजस्व अधिकारी सत्यनारायण मिश्रा ने कहा कि ज्यादातर दुकानें और मकान जमीदारी की हैं। अगर जमींदार से सीधे खरीदी हुई नहीं हैं तो उनको कोई मुआवजा नहीं मिलेगा। केवल बिल्डिंग के तोड़ने का मुआवजा मकान मालिक को (जिनका नगर निगम में नाम है) मिलेगा। इस बात पर नितिन कुमार जायसवाल ने कहा कि इस प्रकार तो 90%प्रतिशत लोगों को जमीन का कोई मुआवजा नहीं मिलेगा।
जब लोगों ने जमीन की रजिस्ट्री करवाई है, उसपर नगर निगम में नाम भी चढ़वाया है, नक्शा भी पास हो रहा है, सरकार अपने सारे शुल्क भी ले रही है तो फिर जमीन का मुआवजा क्यों नहीं दिया जाएगा? ऐसे में तो लगभग सभी लोगों को कोई मुआवजा नहीं मिलेगा। लिमिटेशन एक्ट, 1963 के तहत, अगर कोई व्यक्ति 12 वर्षों तक निरंतर और बिना विरोध के किसी संपत्ति पर कब्जा में रहता है, तो उसे उस संपत्ति का मालिक माना जा सकता है। यहां तो सभी लोग वैध रूप से रजिस्ट्री करवा कर प्रॉपर्टी को खरीदा है और उसपर सरकारी शुल्क भी दे रहे हैं और कोई मुकदमा भी किसी जमीदार की तरफ से नहीं है। जब नगर निगम में नाम के आधार पर कंस्ट्रक्शन का मुआवजा दिया जा रहा तो फिर उसके आधार और रजिस्ट्री के आधार पर मुआवजा भी मिलना चाहिए।
अधिकारियों ने बताया कि किरायेदारों को कोई भी मुआवजा नहीं मिलेगा। जिसपर कई व्यापारियों ने नाराजगी व्यक्त किया अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिला महामंत्री अमित टिबरेवाल और गोरखपुर किराना कमेटी के महामंत्री गोपाल जायसवाल ने कहा कि किरायेदारों के लिए भी मुआवजा का प्रावधान होना चाहिए। जैसा कि की काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में मकान मालिक और किरायेदारों को दिया गया था। अमित टिबरेवाल ने कहा कि यदि खारिज दाखिल नहीं हो रहा और उसके बिना मुआवजा नहीं मिल सकता है, तो इसका भी कोई नियम निकलना चाहिए जिससे कि सभी को जमीन का मुआवजा मिल सके।
अखिल भारत उद्योग व्यापार मण्डल के महानगर अध्यक्ष जितेंद्र शुक्ला और चैंबर ट्रेडर्स के महामंत्री अनूप किशोर अग्रवाल ने कहा कि व्यापारियों को समुचित मुआवजा देना ही चाहिए, जिससे कि वो लोग यदि पूरी दुकान जा रही है तो कम से कम अपने पुनर्वास की व्यवस्था कर सकें। संजीव जैन, सौरभ केडिया और मेराज अहमद ने भी इस बात को कहा कि व्यापारियों का बहुत ज्यादा नुकसान हो रहा है। जिसके बारे में एक बार पुनर्विचार करना चाहिए। नितिन जायसवाल ने कहा कि विरासत गलियारा बहुत सारे लोगों की जमीन जमींदारी की है, जिनका खारिज दाखिल भी नहीं हुआ है, उन लोगों को जमीन का कोई मुआवजा नहीं मिलेगा। जिस जमीन को खरीदने के लिए आपने रजिस्ट्री के समय सरकार को शुल्क दिया था और सरकार आपको मालिकाना हक का पेपर दी है, लेकिन जब बात उस जमीन को आपसे लेना हो, तो कोई भी मुआवजा नहीं मिलेगा। किसी भी सूरत में मकान मालिक और किराएदार, दिनों को ही मुआवजा मिलना ही चाहिए।

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