GST काउंसिल के इस बड़े फैसले से मेडिकल इक्विपमेंट इंडस्ट्रीज खुश, AiMeD ने कहा- पुरानी थी मांग, सरकार को धन्यवाद – AajTak

नई दिल्ली में 8 अक्टूबर 2026 को हुई 57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में व्यापार को आसान बनाने, टैक्स रिफंड में तेजी लाने और कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए कई बड़ी सिफारिशें की गई थीं. खासकर मेडिकल और फार्मा सेक्टर के लिए इस बैठक में बड़े फैसले लिए गए थे. 
मेडिकल इक्विपमेंट और फार्मा कंपनियों (जैसे AiMeD) के लिए सबसे बड़ी राहत यह रही कि काउंसिल ने कैपिटल गुड्स (जैसे बड़ी मशीनरी/प्लांट) और इनपुट सर्विसेज पर फंसी हुई इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के रिफंड को मंजूरी दे दी है. पहले मशीनरी या बाहरी सेवाओं पर दिया गया GST ब्लॉक हो जाता था. अब वह रिफंड के रूप में वापस मिल सकेगा, जिससे कंपनियों का कैश फ्लो मजबूत होगा और उपकरण निर्माताओं की लागत घटेगी. 
नया नियम लागू होने के बाद इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर और एक्सपोर्ट के तहत दावों पर रिस्क मूल्यांकन के आधार पर 90% प्रोविजनल रिफंड बिना किसी अधिकारी के हस्तक्षेप के सिस्टम द्वारा ऑटोमैटिक रूप से स्वीकृत किया जाएगा. 
मेडिकल इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनियों के संगठन ‘एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री’ (AiMeD) ने GST काउंसिल के इस फैसले पर खुशी जाहिर की है. सरकार ने यह सिफारिश की है कि अगर किसी सेक्टर में इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर (यानी कच्चे माल पर टैक्स ज्यादा और तैयार माल पर कम) की समस्या है, तो कंपनियों को पूंजीगत सामान (मशीनों) और बाहरी सेवाओं पर दिए गए टैक्स का रिफंड मिलना चाहिए.
पुराने नियम से क्या दिक्कत थी?
दरअसल, यह फैसला उद्योग जगत की एक बहुत पुरानी और बड़ी मांग को पूरा करता है. इससे भारत में फैक्ट्रियां लगाने और बिजनेस करने का माहौल बहुत आसान और बेहतर हो जाएगा. पहले के नियमों के तहत जब कंपनियां कोई नया प्लांट लगाने के लिए बड़ी मशीनें खरीदती थीं या बाहर से प्रोफेशनल सेवाएं (जैसे कंसल्टेंसी, मार्केटिंग या सुरक्षा वगैरह) लेती थीं तो उस पर जो GST चुकाया जाता था, वह फंस जाता था.
मान लीजिए कोई कंपनी नया प्लांट लगाने के लिए 100 करोड़ रुपये खर्च करती है, तो उस पर प्लांट और मशीनरी के लिए लगभग 18 करोड़ रुपये का जीएसटी देना पड़ता था. पहले इस 18 करोड़ रुपये के टैक्स के इस्तेमाल या रिफंड का कोई साफ रास्ता नहीं होता था. यह पैसा पूरी तरह ब्लॉक हो जाता था, जिससे प्रोजेक्ट की लागत बहुत बढ़ जाती थी और भारतीय कंपनियां ग्लोबल मार्केट में दूसरी कंपनियों से पिछड़ने लगती थीं. 
उद्योग जगत ने किया फैसले का स्वागत 
इस बारे में AiMeD के फोरम कोऑर्डिनेटर और हिंदुस्तान सिरिंज एंड मेडिकल डिवाइसेज लिमिटेड (HMD) के मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव नाथ ने कहा, ‘हम सरकार का दिल से धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने पिछले कई सालों से उठाई जा रही हमारी बातों और सुझावों पर सकारात्मक ध्यान दिया है. यह सुधार हमारे टैक्स सिस्टम की एक बड़ी गलती को ठीक करता है. पहले घरेलू निर्माताओं को मशीनें लगाने और जरूरी बिजनेस सेवाओं पर भारी टैक्स का बोझ उठाना पड़ता था’.
राजीव नाथ की मानें तो अब सरकार ने इस फंसे हुए टैक्स को वापस पाने का रास्ता खोल दिया है और कंपनियों के पास कैश फ्लो बेहतर होगा. इससे भारत में मैन्युफैक्चरिंग को दुनिया भर में मुकाबला करने लायक बनाने और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने में बहुत मदद मिलेगी. 
इससे क्या-क्या फायदे होंगे?
AiMeD को पूरा भरोसा है कि इस नए कदम से देश को कई बड़े लाभ मिलेंगे. कंपनियों के पास पैसा सुरक्षित रहने से वे देश में और अधिक नए प्लांट लगाने के लिए आगे आएंगी. उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ेगी, जिससे देश में ही मेडिकल उपकरणों का उत्पादन और मजबूत होगा. प्रधानमंत्री का ‘मेक इन इंडिया’ का सपना और मजबूत होगा तथा भारत दुनिया का एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बन सकेगा. अब पूरी इंडस्ट्री और AiMeD इस संबंध में सरकार की तरफ से आधिकारिक नोटिफिकेशन आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, 
 एक्सपायरी दवाओं के राइट-ऑफ पर ITC की छूट
इसके अलावा GST काउंसिल की तरह से फॉर्मा सेक्टर को एक और बड़ी राहत दी गई है, जिन दवाओं या स्वास्थ्य उत्पादों की एक्सपायरी खत्म हो जाती है और जिन्हें कानूनन नष्ट करना पड़ता है, उनके राइट-ऑफ पर ITC लाभ की स्पष्टता से फार्मा सेक्टर को फायदा मिलेगा. 
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News