GST Reform: 8% तक सस्ती होंगी छोटी कारें…. राजस्व में 6 अरब डॉलर की कमी! GST में सुधार पर क्या कहती है ये रिपोर्ट – AajTak

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GST Reform impact on small cars: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री द्वारा जब गुड्स एंड सर्विस टैक्स में सुधार (GST Reforms) का ऐलान किया गया, जब से देश भर में कुछ ख़ास वस्तुओं और सर्विसेज के सस्ते होने की चर्चा हो रही है. पीएम मोदी ने लालकिले के प्राचरी से कहा कि, ये जीएसटी रिफॉर्म अक्टूबर में दिवाली से पहले किया जा सकता है, जो आम आदमी के लिए दिवाली गिफ्ट जैसा होगा. इस जीएसटी सुधार के दायरे में वाहन भी शामिल हैं, जिनकी कीमतों में भारी गिरावट की उम्मीद की जा रही है.
एचएसबीसी की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वाहनों पर जीएसटी में संभावित कमी से छोटी कारों की कीमतों में उल्लेखनीय कमी आ सकती है. रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि अगर छोटी कारों पर जीएसटी की दर मौजूदा 28% से घटाकर 18% कर दी जाए, तो इन वाहनों की कीमतों में लगभग 8% की कमी देखने को मिल सकती है. 
बताया जा रहा है केंद्र सरकार ने जीएसटी स्लैब में सुधार के लिए प्रस्ताव दिया है और यदि यह प्रस्ताव माना जाता है तो छोटी कारों की कीमत में तगड़ी कमी आएगी. इससे फेस्टिव सीजन के मौके पर ऑटो सेक्टर को तगड़ा लाभ मिल सकता है. बशर्ते जीएसटी सुधार में ये ऐलान दिवाली के पहले घोषित किया जाए. इस बार दिवाली 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी. भारत में ज्यादातर लोग इस धनतेरस और दिवाली के मौके पर अपने घर में नए वाहन लाते हैं.
मौजूदा समय में, पैसेंजर व्हीकल्स पर 28% से 50% तक जीएसटी टैक्स लगाया जाता है, जो वाहन के साइज, फ्यूल टाइप और इंजन क्षमता पर निर्भर करता है. जीएसटी के अलावा इन वाहनों पर सेस (Cess) भी लगाया जाता है, जो 1% से 5% है. इससे वाहनों की कीमत में और भी इजाफा हो जाता है. ख़बर है कि, छोटी कारें, जिन पर वर्तमान में 28 प्रतिशत जीएसटी और 1-3 प्रतिशत की सेस (Cess) दरें लागू होती हैं, नए बदलाव के बाद ये 18 प्रतिशत टैक्स स्लैब में आ सकती हैं.
रिपोर्ट में छोटी कारों की कीमतों में 8% की संभावित गिरावट का अनुमान लगाया गया है, जबकि बड़ी कारों की कीमतों में 3% से 5% तक की कमी की उम्मीद है. रिपोर्ट में जीएसटी में एकसमान कटौती की संभावना पर भी विचार करने की बात कही गई है. अगर सभी वाहन श्रेणियों पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% कर दिया जाए, तो सभी कारों के लिए कीमतों में लगभग 6% से 8% का लाभ हो सकता है. 
हालाँकि, वाहन के साइज के आधार पर मौजूदा उपकर यानी ‘Cess’ को बनाए रखने का मतलब है कि ऐसी स्थिति की संभावना कम है. रिपोर्ट में सरकार खजाने में होने वाले संभावित नुकसान की तरफ भी इशारा किया गया है. जिसके अनुसार इस तरह की किसी भी व्यापक टैक्स कटौती से सरकार को अनुमानित 5 अरब से 6 अरब अमेरिकी डॉलर के बीच राजस्व में गिरावट का सामना करना पड़ेगा.
रिपोर्ट में एक रिवाइज़्ड टैक्सेशन मैकेनिज़्म का भी सुझाव दिया गया है, जिसके तहत छोटी कारों पर 18% की कम दर से कर लगाया जा सकता है, जबकि बड़े वाहनों पर 40% की “स्पेशल रेट” लागू हो सकती है, और मौजूदा उपकर समाप्त कर दिया जाएगा. इस प्रस्ताव का उद्देश्य यह है कि, वाहनों के साइज और टाइप के अनुसार टैक्सेशन के तरीके को अनुकूलित करना है. जिससे बाजार में संतुलन बना रहे.
भारत में 1000 सीसी से लेकर 1500 सीसी (1.0 लीटर से 1.5 लीटर इंजन) वाली कारों की डिमांड सबसे ज्यादा है. जिसमें सबसे सस्ती कार मारुति ऑटो के10 से लेकर हुंडई क्रेटा जैसी एसयूवी शामिल हैं. बीते जुलाई की टॉप 10 बेस्ट सेलिंग कारों की लिस्ट से यदि केवल महिंद्रा स्कॉर्पियो को बाहर कर दें तो कुल 10 में से 9 कारें 1.0 लीटर से 1.5 लीटर इंजन क्षमता के बीच आती हैं. इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि, जीएसटी में इस सुधार का आम आदमी को किस कदर लाभ मिलेगा.
नए वाहनों के लिए, जीएसटी दरें कार के कैटेगरी और साइज के आधार पर अलग-अलग हैं. 1200 सीसी तक की इंजन क्षमता और 4 मीटर से कम लंबाई वाली छोटी पेट्रोल कारों पर 28% जीएसटी और 1% उपकर लगता है. जबकि छोटी डीजल कारों (1500 सीसी तक, 4 मीटर से कम) पर 3% उपकर के साथ 28% जीएसटी लगता है. 
वहीं मिड-साइज की कारों पर कुल 43%, लग्ज़री कारों पर 48% और एसयूवी पर सबसे ज़्यादा 50% तक का टैक्स लगता है. दूसरी ओर, इलेक्ट्रिक वाहनों पर केवल 5% जीएसटी टैक्स लागू होता है. जिससे वे अधिक किफायती हो जाते हैं. जीएसटी से पहले के दौर की तुलना में, छोटी कारों और लग्ज़री कारों पर कर का बोझ कम हुआ है, जबकि मिड-साइज की कारें थोड़ी महंगी हुई हैं.
 
पिछले कुछ सालों में एंट्री लेवल छोटी कारों का बिजनेस बुरी तरह प्रभावित हुआ है. 5 लाख रुपये से भी कम कीमत में आने वाली एंट्री लेवल कारें, जिनकी बिक्री वित्तीय वर्ष-16 में 10 लाख से ज्यादा यूनिट्स की थी वो वित्तीय वर्ष-25 में घटकर 25,402 यूनिट पर आ गिरी हैं. कुल कार बिक्री में हैचबैक कारों की हिस्सेदारी आधी रह गई है, जो 2020 में 47 प्रतिशत से घटकर 2024 में 24 प्रतिशत हो गई है. ऐसे में यदि छोटी कारों पर टैक्स का बोझ कम होता है तो लोग इन कारों की तरफ मुखर होंगे और इनकी बिक्री बढ़ने की उम्मीद है. 
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