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India-China Border Dispute: भारत और चीन की सेनाओं ने पूर्वी लद्दाख में देपसांग और डेमचोक से सैनिकों की वापसी पूरी कर ली है, जिससे चार साल से जारी गतिरोध समाप्त होने की ओर है. दोनों देश संबंध सामान्य बनाने पर काम कर रहे हैं, लेकिन भारत ने स्पष्ट किया है कि सीमा पर शांति के बिना संबंध सामान्य नहीं हो सकते.
India-China Border Dispute: भारत की दृढ़ता के बाद चीन ने पूर्वी लद्दाख में अपने रुख में बदलाव किया है. चीन के रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि भारत और चीन की सेनाएं सीमा पर जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए किए गए प्रस्तावों को ‘‘व्यापक और प्रभावी’’ तरीके से लागू कर रही हैं. उन्होंने यह भी कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए चीन भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है.
चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता, वरिष्ठ कर्नल वु कियान ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि इस समय दोनों देशों की सेनाएं पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद से जुड़े समझौतों को पूरी तरह से लागू करने की प्रक्रिया में हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि सीमा पर तनाव कम हो रहा है और संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में दोनों देश आगे बढ़ रहे हैं.
भारत और चीन ने पिछले साल के अंत में देपसांग और डेमचोक क्षेत्रों से अपनी सेनाओं की वापसी को लेकर समझौता किया था, जिसे अब पूरी तरह लागू कर दिया गया है. इन विवादित क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी के साथ ही चार वर्षों से चले आ रहे सीमा तनाव के खत्म होने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है.
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समझौते के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 23 अक्टूबर को रूस के कज़ान में मुलाकात की थी. इस बैठक में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने और वार्ता प्रक्रिया को फिर से शुरू करने पर सहमति जताई थी. इसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने 18 दिसंबर को बीजिंग में विशेष प्रतिनिधि स्तर की 23वीं बैठक की. इसी क्रम में, 26 जनवरी को भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बीजिंग की यात्रा कर अपने चीनी समकक्ष सुन वेइदोंग से बातचीत की.
लगातार हो रही इन वार्ताओं से संकेत मिलता है कि भारत और चीन अपने संबंधों को फिर से सामान्य बनाने के प्रयास में लगे हैं. हालांकि, भारत स्पष्ट कर चुका है कि जब तक सीमावर्ती इलाकों में पूरी तरह से शांति बहाल नहीं होगी, तब तक चीन के साथ उसके संबंध सामान्य नहीं हो सकते.
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