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खुर्जा (Khurja) उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले का एक शहर और नगर पालिका क्षेत्र है. यह बुलंदशहर शहर से लगभग 20 किलोमीटर और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से करीब 85 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. सड़क और रेल मार्ग से अच्छी कनेक्टिविटी होने के कारण खुर्जा पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण शहरी क्षेत्र माना जाता है. प्रशासनिक और व्यावसायिक गतिविधियों के साथ-साथ यह शहर अपने पारंपरिक सिरेमिक उद्योग के लिए जाना जाता है.
खुर्जा नाम के बारे में माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति फारसी और उर्दू शब्द “खारजा” से हुई है, जिसका अर्थ “विदेशी” होता है. ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार, 14वीं शताब्दी के आसपास तैमूर की सेना के कुछ सैनिक और अधिकारी इस क्षेत्र में आकर बस गए थे. इन्हीं लोगों के बसने के बाद खुर्जा एक संगठित नगर के रूप में विकसित हुआ. उस समय सेना के साथ आए कुछ कारीगर मिट्टी के बर्तन बनाने की कला में दक्ष थे, जिन्होंने यहां इस शिल्प की शुरुआत की.
समय के साथ खुर्जा में मिट्टी के बर्तनों का काम विकसित होता गया. शुरुआती दौर में लाल मिट्टी के बर्तन बनाए जाते थे, जिसके बाद नीली ग्लेज वाली पॉटरी और सफेद परत पर फूलों की डिजाइन वाली सिरेमिक वस्तुएं तैयार की जाने लगीं. पारंपरिक तकनीकों के साथ इस उद्योग में धीरे-धीरे नए प्रयोग भी शामिल होते गए.
आज खुर्जा में 500 से अधिक सिरेमिक और पॉटरी इकाइयां संचालित होने का उल्लेख मिलता है. यहां घरेलू उपयोग के बर्तन, कप, प्लेट, कटोरी, डिनर सेट, सजावटी सामान, टाइल्स, प्लांटर और अन्य सिरेमिक उत्पाद बनाए जाते हैं. इन उत्पादों की आपूर्ति देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ कई विदेशी बाजारों तक भी होती है. शहर के कई हिस्सों में फैक्ट्रियों की ऊंची चिमनियां इसकी औद्योगिक पहचान का हिस्सा हैं.
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान धातु के बर्तनों के उपयोग पर कई प्रतिबंध लगाए गए थे और सिरेमिक उत्पादों के आयात में भी कमी आई थी. उस समय युद्ध अस्पतालों और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने खुर्जा में एक सिरेमिक इकाई की स्थापना की. युद्ध समाप्त होने के बाद वर्ष 1946 में मांग कम होने के कारण इस फैक्ट्री को बंद कर दिया गया. बाद में इसे पूरी तरह समाप्त करने के बजाय सरकार ने इसे पॉटरी डेवलपमेंट सेंटर के रूप में विकसित किया, जहां सिरेमिक उद्योग से जुड़े प्रशिक्षण और तकनीकी विकास के कार्य किए जाने लगे.
खुर्जा अपने एक पारंपरिक मिठाई “खुरचन” के लिए भी जाना जाता है, जो स्थानीय स्तर पर लोकप्रिय है. शहर में हिंदी, उर्दू और अन्य स्थानीय भाषाएं बोली जाती हैं. यहां स्कूल, कॉलेज, बाजार, सरकारी कार्यालय और अन्य आवश्यक नागरिक सुविधाएं उपलब्ध हैं. रेलवे जंक्शन और राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ाव के कारण खुर्जा उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक क्षेत्रों में से एक माना जाता है.
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