Kushinagar News: पड़रौना, निज संवाददाता।
भारत सरकार के सर्व शिक्षा अभियान से पिछले 27 वर्षों से जुड़े प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षा मित्रों ने सरकार से वर्ष 2000 से कर रहे अपने परिश्रम का फल मांगा है। शिक्षा मित्रों की बैठक की अध्यक्षता कर रहे उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ के कुशीनगर जिलाध्यक्ष कैलाश जायसवाल ने कहा कि जब मांगने से नहीं मिलता हक तो उसे लड़कर लेना ही पड़ता है। इस भीषण महंगाई के दौर में महज 18 हजार मासिक मानदेय देकर सरकार कोई एहसान नहीं कर रही है।
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ के तत्वावधान में हुई बैठक की अध्यक्षता करते हुए कैलाश जायसवाल ने सरकार से अपना मौलिक अधिकार मांगा। उन्होंने कहा कि संविधान में यह नियम वर्णित है कि किसी भी श्रमिक, कर्मचारी या कामगार को उसके परिश्रम के हिसाब से उचित पारिश्रमिक दी जानी चाहिए। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना सर्व शिक्षा अभियान बेसिक स्कूलों के माध्यम से वर्ष 2000 में शुरू हुआ। इसी योजना को सफल क्रियान्वयन के लिए प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा मित्रों की नियुक्ति हुई। प्रारंभिक दौर में पढ़ाई कर रहे या अभी अभी पढ़ाई पूरी किये युवक-युवतियों ने आवेदन कर मेरिट के अनुसार चयन पाकर शिक्षण कार्य प्रारंभ किया था।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि उस समय युवाओं ने अपने भविष्य को लेकर सपना देखा था और पूरी तरह उसी पर निर्भर हो गए थे। राजकुमार पांडेय ने कहा कि वर्ष 2014 में शिक्षा मित्रों का समायोजन सहायक अध्यापक पद पर हुआ था तो खुशी का ठिकाना नहीं था। प्राथमिक शिक्षा की रीढ़ कहे जाने वाले शिक्षा मित्रों ने दुगुनी ऊर्जा से बच्चों को पढ़ाने लगे थे, लेकिन समायोजन निरस्त होने के बाद शिक्षा मित्र पूरी तरह से टूट गए। अंजू मधुप ने कहा कि वर्ष 2017 में जब समायोजन निरस्त हुआ तब से अब तक अवसाद और गुस्से में 11 हजार शिक्षा मित्र काल के गाल में समा गए। मांग किया कि शिक्षा मित्रों को स्थायी कर उन्हें सहायक अध्यापक को मिलने वाले वेतन के बराबर पारिश्रमिक दिया जाए। इस दौरान सत्येंद्र तिवारी, संजय यादव, संतोष चौहान, दिनेश शर्मा, गोविन्द यादव, शालू सिंह, सीमा आर्य, अमित मिश्र, वर्षा सागर, सुनील कुमार यादव, लाल बहादुर यादव, उमेश पाठक, दीना नाथ शर्मा आदि मौजूद रहे।
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