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मध्य प्रदेश में लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत जारी प्रमाण पत्र ने एक बार फिर बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने में अहम भूमिका निभाई है. एक नाबालिग बेटी की शादी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही थीं, लेकिन लाड़ली लक्ष्मी योजना के दस्तावेज और एक सतर्क नागरिक की शिकायत के चलते समय रहते यह विवाह रुकवा दिया गया.
जवा थाना इलाके के एक परिवार की बेटी का विवाह चकघाट स्थित चंदई गांव के 22 वर्षीय युवक से तय किया गया था. 27 मई 2025 को बारात आने वाली थी. शादी की लगभग सभी रस्में पूरी हो चुकी थीं. घर में मेहमान जुट चुके थे और पंडाल सजा हुआ था. महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस विभाग को एक जागरूक व्यक्ति ने शिकायत दी, जिसमें बताया गया कि जिस लड़की की शादी कराई जा रही है, वह सिर्फ 16 साल 5 महीने की है.
शिकायत की पुष्टि लाड़ली लक्ष्मी योजना के आश्वासन प्रमाण पत्र से की गई, जिसमें बेटी की जन्मतिथि 5 दिसंबर 2008 दर्ज थी. इसी आधार पर पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंचकर विवाह को रुकवा दिया. अधिकारियों ने परिजनों को समझाइश दी और विवाह की वैधानिक उम्र पूरी होने से पहले शादी न कराने की कड़ी चेतावनी दी.
एसपी विवेक सिंह ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि जवा थाना क्षेत्र में बाल विवाह की सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई की गई. टीम ने मौके पर पहुंचकर जन्म प्रमाण पत्र और लाड़ली लक्ष्मी योजना के दस्तावेजों की जांच की. शिकायत सही पाई गई. यदि परिजन विवाह कराने की जिद पर अड़े रहते, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाती. यह मामला सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता और सामाजिक जागरूकता का उत्तम उदाहरण बन गया है.
बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार की लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत बेटियों को जन्म से लेकर 21 साल की उम्र तक 1.43 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है.
प्रदेश सरकार की ओर से एक बयान जारी कर कहा गया कि सरकारी योजनाओं के दस्तावेजों का उपयोग सही तरीके से किया जाए, तो समाज में बदलाव लाया जा सकता है. लाड़ली लक्ष्मी योजना का यह प्रमाण पत्र सिर्फ एक कागज नहीं, बल्कि नारी सम्मान और सुरक्षा की गारंटी बनकर सामने आया है.
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