भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) एक बार फिर भारी राजनीतिक घमासान और संस्थागत साख के सवालों के घेरे में है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और फॉर्म-6 की प्रक्रिया पर विपक्ष के तीखे हमलों के बीच आयोग के भीतर आंतरिक मतभेदों और फैसलों की निष्पक्षता पर गंभीर बहस छिड़ गई है। इतिहास के पन्नों को पलटें तो पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी. एन. शेषण (T.N. Seshan) के दौर में चुनाव आयोग सत्ताधारी सरकारों की मनमानी से सीधे टकराने और चुनावी सुधारों को सख्ती से लागू करने के लिए जाना जाता था। उस दौर में आयोग बहु-सदस्यीय संस्था के रूप में विकसित हुआ और सरकार बनाम आयोग की सीधी जंग देखने को मिली…भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) एक बार फिर भारी राजनीतिक घमासान और संस्थागत साख के सवालों के घेरे में है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और फॉर्म-6 की प्रक्रिया पर विपक्ष के तीखे हमलों के बीच आयोग के भीतर आंतरिक मतभेदों और फैसलों की निष्पक्षता पर गंभीर बहस छिड़ गई है। इतिहास के पन्नों को पलटें तो पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी. एन. शेषण (T.N. Seshan) के दौर में चुनाव आयोग सत्ताधारी सरकारों की मनमानी से सीधे टकराने और चुनावी सुधारों को सख्ती से लागू करने के लिए जाना जाता था। उस दौर में आयोग बहु-सदस्यीय संस्था के रूप में विकसित हुआ और सरकार बनाम आयोग की सीधी जंग देखने को मिली।
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