Xप्लेन: वन नेशन, वन टाइम, भारत में अनिवार्य हुआ IST, जानिए 10 प्रमुख बातें – ABP News

अब भारत में इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (IST) का इस्तेमाल करना ज़रूरी होगा.  केंद्र की मोदी सरकार ने शनिवार को लीगल मेट्रोलॉजी (इंडियन स्टैंडर्ड टाइम) रूल्स, 2026 की घोषणा की. इसके तहत अब नियम छपने के 180 दिन बाद ये नियम लागू होंगे. इसका मतलब है कि नए रूल मार्च 2027 के आसपास अनिवार्य हो जाएगा.
इस नोटिफिकेशन के तहत, सभी कानूनी, प्रशासनिक और आधिकारिक डॉक्यूमेंट्स के लिए IST को अनिवार्य टाइम रेफरेंस बना दिया गया है, जब तक कि इसके लिए कोई खास छूट न दी गई हो. अब संस्थाओं को आधिकारिक कामों के लिए IST के अलावा किसी अन्य टाइम रेफरेंस का इस्तेमाल, डिस्प्ले या रिकॉर्ड करने की इजाज़त नहीं होगी, सिवाय उन मामलों के जहां विदेशी टाइम ज़ोन साफ़ तौर पर बताए गए हों या जहां वैज्ञानिक रिसर्च, नेविगेशन या खगोल विज्ञान के लिए वैकल्पिक टाइम सोर्स की इजाज़त हो. 
आइए इस महत्वपूर्ण फैसले के हर पहलू को आसान और स्पष्ट 10 बिंदुओं में समझते हैं:
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा घोषित नए नियमों के तहत, भारत में सभी संस्थाओं के लिए कानूनी, प्रशासनिक, कमर्शियल और डिजिटल कार्यों में इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (IST) का इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा.
यह नियम आधिकारिक गैजेट में प्रकाशन के 180 दिनों के भीतर लागू हो जाएगा, जिससे मार्च 2027 के आसपास से पूरे देश में IST का पालन अनिवार्य हो जाएगा. लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट, 2009 के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाली संस्थाओं पर कानूनी जुर्माना लगाया जाएगा.
अभी के हालात में देखें तो भारत के कई डिजिटल सर्वर, टेलीकॉम नेटवर्क और वित्तीय संस्थान अमेरिकी GPS या अनसर्टिफाइड ग्लोबल NTP (नेटवर्क टाइम प्रोटोकॉल) सर्वरों पर निर्भर हैं. IST के अनिवार्य होने से देश का अपना एकीकृत और संप्रभु ‘नेशनल टाइम इंफ्रास्ट्रक्चर’ तैयार होगा.
अलग-अलग सर्वरों के समय में कुछ मिलीसेकंड या नैनोसेकंड का अंतर भी डेटा ट्रांसफर, बैंकिंग ट्रांज़ैक्शन और नेटवर्क ऑडिटिंग में बड़ी कमियां पैदा कर देता है. एक समान टाइम रेफरेंस होने से लॉगिंग एरर और ऑडिट विवाद पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे.
शेयर बाजार (BSE/NSE) में हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग (HFT), यूपीआई (UPI), और बैंकिंग ऑपरेशन्स माइक्रोसेकंड-स्तर की सटीकता पर निर्भर करते हैं. IST का सिंक्रोनाइज्ड टाइमस्टैम्पिंग धोखाधड़ी, डबल-स्पेंडिंग और डेटा हेरफेर को रोकता है.
आधुनिक 5G सेवाओं और फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क को सुचारू रूप से चलाने के लिए टावरों के बीच नैनोसेकंड स्तर का फेज़ सिंक्रोनाइज़ेशन आवश्यक होता है. सटीक समय मिलने से कॉल ड्रॉप, डेटा पैकेट लॉस और नेटवर्क लेटेंसी की समस्या खत्म होगी.
राष्ट्रीय पावर ग्रिड में बिजली की फ्रीक्वेंसी को स्थिर रखने के लिए सिंक्रोनाइज्ड फेजर मेजरमेंट यूनिट्स (PMUs) की ज़रूरत होती है. इसके अलावा रेलवे, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और लॉजिस्टिक्स में शेड्यूलिंग से जुड़े हादसों और सुरक्षा खतरों से बचने के लिए भी IST निर्णायक साबित होगा.
नई दिल्ली स्थित CSIR-नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी (NPL) भारत के आधिकारिक समय पैमाने को अपनी एटॉमिक घड़ियों से बनाए रखती है. इस सटीक समय का प्रसार ISRO के स्वदेशी NavIC (नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन) सैटेलाइट नेटवर्क और रीजनल रेफरेंस स्टैंडर्ड्स लेबोरेटरीज (RRSLs) के जरिए पूरे देश में किया जाएगा.
GPS स्पूफिंग, सिग्नल जैमिंग और NTP एम्प्लीफिकेशन जैसे साइबर हमलों के जरिए हैकर्स सर्वर टाइम से छेड़छाड़ करते हैं. राष्ट्रीय स्तर पर एक ही लीगल टाइम रेफरेंस होने से साइबर हमलों के बाद डिजिटल फोरेंसिक जांच में सभी सर्वरों की लॉग फाइलें आसानी से मैच की जा सकेंगी. इसके साथ ही, संगठनों को बैकअप के रूप में आपातकालीन टाइमिंग सिस्टम (आवश्यकता पड़ने पर एटॉमिक क्लॉक) बनाए रखने होंगे.
अमेरिका (NIST), यूरोप और चीन जैसे विकसित देशों में पहले से ही सख्त राष्ट्रीय समय-सिंक्रोनाइज़ेशन व्यवस्था लागू है. 180 दिनों का ग्रेस पीरियड भारतीय आईटी कंपनियों, टेलीकॉम ऑपरेटरों और सरकारी विभागों को अपने पुराने सर्वरों, सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर क्लॉक्स को IST के साथ अपग्रेड करने का पर्याप्त समय देता है.
विभिन्न देशों के नेशनल स्टैंडर्ड टाइम स्केल और संचालन संस्थाए
• UTC(NIST)
• UTC(USNO)
NIST (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्टैंडर्ड्स एंड टेक्नोलॉजी)
USNO (यूनाइटेड स्टेट्स नेवल ऑब्जर्वेटरी)
• NIST सिविलियन टाइम स्टैंडर्ड (NIST-F1/F2 सीज़ियम फाउंटेन) चलाता है.
• USNO टाइम रेफरेंस का उपयोग DoD और US स्पेस फोर्स GPS सैटेलाइट्स के लिए करते हैं.
• UTC(NTSC)
• बीजिंग टाइम
• हाइड्रोजन मेसर और सीज़ियम एटॉमिक क्लॉक नेटवर्क पर आधारित.
• BeiDou नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (BDS) में इंटीग्रेटेड, जिससे विदेशी निर्भरता खत्म होती है.
• UTC(SU)
• मॉस्को टाइम
• रूस के सभी 11 टाइम ज़ोन के लिए कानूनी रेफरेंस.
• GLONASS सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम के लिए मुख्य टाइमिंग रेफरेंस प्रदान करता है.
• UTC(NICT)
• जापान स्टैंडर्ड टाइम (JST)
• ऑप्टिकल लैटिस क्लॉक और सीज़ियम स्टैंडर्ड का उपयोग.
• रेडियो स्टेशनों (JJY) और QZSS (मिचिबिकी) सैटेलाइट सिस्टम के ज़रिए टाइम सिंक.
• DCF77 लॉन्गवेव टाइम सिग्नल ट्रांसमीटर चलाता है.
• यह ट्रांसमीटर पूरे यूरोप में लाखों घड़ियों को ऑटो-सिंक (sync) करता है.
संकल्प ठाकुर पिछले 10 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत न्यूज़ 24 से की, इसके बाद न्यूज़ नेशन में कार्य किया. वर्तमान में वह एबीपी हिंदी डिजिटल में डिप्टी प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं और पिछले सात वर्षों से संस्थान के साथ जुड़े हुए हैं. उन्हें खेल, अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और चुनावी राजनीति से जुड़ी खबरों की गहरी समझ है. इसके अलावा साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेखन उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता का क्षेत्र है. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है.
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