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यवतमाल: जिले के दिग्रस तहसील में रेत उत्खनन पर सरकार द्वारा पाबंदी के बावजूद हर दिन हजारों ब्रास रेत अवैध रूप से नदी और नालों से निकाली जा रही है। इससे सरकारी राजस्व में करोड़ों रुपये की हानि हो रही है, जबकि रॉयल्टी से होने वाली आय में कोई वृद्धि नहीं हो रही है।सरकार की उदासीन नीति और रेत उत्खनन पर स्पष्ट दिशा-निर्देशों की कमी ने इस समस्या को गंभीर बना दिया है।
अवैध रेत खनन में भारी आर्थिक लेन-देन हो रही है, लेकिन सरकारी मशीनरी इसे रोकने में नाकाम साबित हो रही है। इसके परिणामस्वरूप रेत का अवैध भंडारण और खुलेआम बिक्री हो रही है, स्थानीय प्रशासन जैसे तहसीलदार, नायब तहसीलदार और जिलाधिकारी इस मुद्दे पर पूरी तरह से उदासीन दिखाई दे रहे हैं, जिससे रेत माफिया का कारोबार फल-फूल रहा है। लाखों रुपये के सरकारी राजस्व का नुकसान हो रहा है, और रेत खनन करने वाले अवैध कारोबारियों के लिए यह एक लाभकारी धंधा बन चुका है। हालांकि सरकार ने रेत उत्खनन पर प्रतिबंध लगा दिया है, लेकिन बिना किसी ठोस नीति और प्रभावी कार्रवाई के यह समस्या और भी विकराल होती जा रही है।
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