अकोला में ‘भोंदू बाबा’ का काला सच उजागर, बच्चों पर क्रूरता का वीडियो वायरल, केस दर्ज – News24 Hindi

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महाराष्ट्र के अकोला जिले से अंधश्रद्धा की आड़ में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने उस काले सच को उजागर कर दिया, जिसे अब तक ‘चमत्कार’ और ‘आस्था’ का नाम देकर छिपाया जा रहा था. इस वीडियो के सामने आते ही पुलिस हरकत में आई और खुद को “गुलाल शेष बाबा” बताने वाले चेतन सुनील मुळे के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है.
मूर्तिजापुर तहसील के निंभा गांव से सामने आए इस वीडियो में जो दिखता है, वह न सिर्फ चौंकाने वाला है बल्कि बेहद भयावह भी. कथित बाबा मासूम बच्चों को उनके कपड़ों से पकड़कर बेरहमी से घुमाता नजर आता है, मानो यह कोई धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि क्रूरता का प्रदर्शन हो. इतना ही नहीं, वह कीलों से भरे पाट पर बैठकर तथाकथित ‘चमत्कार’ दिखाने की कोशिश करता है—जिसे देखकर अंधविश्वास और धोखे का खतरनाक खेल साफ दिखाई देता है.
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अपराध क्रमांक 189/2026 के तहत केस दर्ज किया है. आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 125, बाल न्याय (देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 की धारा 75 और महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन कानून 2013 की धारा 3 के तहत कार्रवाई की जा रही है. यह कदम बाल कल्याण समिति की सदस्य प्रांजली जैस्वाल की शिकायत के बाद उठाया गया.
‘दरबार’ के नाम पर डर और धोखे का कारोबार
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, यह तथाकथित बाबा हर सोमवार और खास मौकों पर ‘दरबार’ लगाता था. यहां संतान प्राप्ति और अन्य इच्छाओं के पूरे होने के दावे किए जाते थे. इन दावों के जाल में फंसकर दूर-दराज से लोग अपने बच्चों को यहां लाते थे—और अनजाने में उन्हें इस खतरनाक ढोंग का हिस्सा बना देते थे.
इस घटना के बाद गांव में गुस्सा और असहमति साफ देखने को मिली. ग्रामीणों ने दो टूक कहा—
“यहां गांव के लोग नहीं जाते, बाहर के लोग आते हैं.”
“हम विज्ञान में विश्वास करते हैं, ऐसे अंधविश्वास में नहीं.”
कुछ लोगों ने यह भी बताया कि इन दरबारों के दौरान तेज डीजे और लाउडस्पीकर से गांव का माहौल बिगड़ता है और बच्चों की पढ़ाई पर भी बुरा असर पड़ता है.
करीब 1000 की आबादी वाले इस गांव में 3 से 4 ऐसे कथित बाबाओं के सक्रिय होने की बात सामने आई है. यह महज एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि अंधविश्वास के संगठित फैलाव की ओर इशारा करता है—जहां आस्था के नाम पर लोगों की भावनाओं और मासूमियत का शोषण किया जा रहा है.
यह भी पढ़ें;मुंबई में सेक्सटॉर्शन रैकेट का भंडाफोड़, महिला क्रिकेटर समेत 3 गिरफ्तार, 60 लाख से ज्यादा की
अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने इस पूरे मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है. वहीं पुलिस ने भी इलाके के सभी संदिग्ध बाबाओं को नोटिस जारी कर साफ चेतावनी दी है—ऐसी गतिविधियां तुरंत बंद करें, वरना सख्त कार्रवाई तय है.
यह भी पढ़ें;शादी के लिए बना नकली ‘दरोगा’! पूरे शहर में लगाए पोस्टर, पोल खुली तो निकला सब्जी वाला
महाराष्ट्र के अकोला जिले से अंधश्रद्धा की आड़ में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने उस काले सच को उजागर कर दिया, जिसे अब तक ‘चमत्कार’ और ‘आस्था’ का नाम देकर छिपाया जा रहा था. इस वीडियो के सामने आते ही पुलिस हरकत में आई और खुद को “गुलाल शेष बाबा” बताने वाले चेतन सुनील मुळे के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है.
मूर्तिजापुर तहसील के निंभा गांव से सामने आए इस वीडियो में जो दिखता है, वह न सिर्फ चौंकाने वाला है बल्कि बेहद भयावह भी. कथित बाबा मासूम बच्चों को उनके कपड़ों से पकड़कर बेरहमी से घुमाता नजर आता है, मानो यह कोई धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि क्रूरता का प्रदर्शन हो. इतना ही नहीं, वह कीलों से भरे पाट पर बैठकर तथाकथित ‘चमत्कार’ दिखाने की कोशिश करता है—जिसे देखकर अंधविश्वास और धोखे का खतरनाक खेल साफ दिखाई देता है.
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अपराध क्रमांक 189/2026 के तहत केस दर्ज किया है. आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 125, बाल न्याय (देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 की धारा 75 और महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन कानून 2013 की धारा 3 के तहत कार्रवाई की जा रही है. यह कदम बाल कल्याण समिति की सदस्य प्रांजली जैस्वाल की शिकायत के बाद उठाया गया.
‘दरबार’ के नाम पर डर और धोखे का कारोबार
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, यह तथाकथित बाबा हर सोमवार और खास मौकों पर ‘दरबार’ लगाता था. यहां संतान प्राप्ति और अन्य इच्छाओं के पूरे होने के दावे किए जाते थे. इन दावों के जाल में फंसकर दूर-दराज से लोग अपने बच्चों को यहां लाते थे—और अनजाने में उन्हें इस खतरनाक ढोंग का हिस्सा बना देते थे.
इस घटना के बाद गांव में गुस्सा और असहमति साफ देखने को मिली. ग्रामीणों ने दो टूक कहा—
“यहां गांव के लोग नहीं जाते, बाहर के लोग आते हैं.”
“हम विज्ञान में विश्वास करते हैं, ऐसे अंधविश्वास में नहीं.”
कुछ लोगों ने यह भी बताया कि इन दरबारों के दौरान तेज डीजे और लाउडस्पीकर से गांव का माहौल बिगड़ता है और बच्चों की पढ़ाई पर भी बुरा असर पड़ता है.
करीब 1000 की आबादी वाले इस गांव में 3 से 4 ऐसे कथित बाबाओं के सक्रिय होने की बात सामने आई है. यह महज एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि अंधविश्वास के संगठित फैलाव की ओर इशारा करता है—जहां आस्था के नाम पर लोगों की भावनाओं और मासूमियत का शोषण किया जा रहा है.
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अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने इस पूरे मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है. वहीं पुलिस ने भी इलाके के सभी संदिग्ध बाबाओं को नोटिस जारी कर साफ चेतावनी दी है—ऐसी गतिविधियां तुरंत बंद करें, वरना सख्त कार्रवाई तय है.
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