अल्टीमेटम: खाद के साथ जबरन अन्य उत्पाद थोंपा तो नपेंगे हॉलसेलर अल्टीमेटम: खाद के साथ जबरन अन्य उत्पाद थोंपा तो नपेंगे हॉलसेलर सभी थोक विक्रेताओं के बीच समानुपातिक रूप से बंटेगी खाद की खेप कंपनियों को खाद का रैक भेजने से 2 दिन पहले विभाग को देनी होगी सूचना
डीएओ ने उर्वरक कंपनियों के क्षेत्रीय प्रबंधकों के साथ की बैठक, दिये कई निर्देश फोटो कृषि कार्यालय: जिला कृषि कार्यालय में मंगलवार को उर्वरक कंपनियों के क्षेत्रीय प्रबंधकों के साथ समीक्षा बैठक करते डीएओ डॉ. नितेश कुमार। बिहारशरीफ, कार्यालय प्रतिनिधि। खरीफ सीजन (धान की खेती) में किसानों को खाद के लिए परेशान न होना पड़े और उन्हें निर्धारित दर पर ही उर्वरक मिले, इसे लेकर कृषि विभाग एक्शन मोड में आ गया है। मंगलवार को जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. नितेश कुमार ने उर्वरक कंपनियों के क्षेत्रीय प्रबंधकों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने कंपनी के पदाधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि खाद के साथ किसी भी अन्य उत्पाद की जबरन बिक्री (टैगिंग) किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही, गुपचुप तरीके से रैक मंगाने के खेल पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
चहेतों को खाद देने के खेल पर लगाम: अक्सर शिकायत मिलती है कि कंपनियां कुछ चुनिंदा थोक विक्रेताओं को ही खाद का बड़ा स्टॉक दे देती हैं, जिससे बाजार में कृत्रिम किल्लत पैदा होती है। डीएओ ने निर्देश दिया कि जिले को आवंटित उर्वरकों का वितरण सभी थोक विक्रेताओं के बीच समान (समानुपातिक) रूप से किया जाए। किसी एक विक्रेता का एकाधिकार नहीं होना चाहिए। ताकि, किसानों को आसानी से खाद मिल सके। रैक आने से पहले देनी होगी सूचना: समीक्षा में यह बात सामने आई कि उर्वरक कंपनियों द्वारा विभाग की पूर्व अनुमति के बिना ही खाद का रैक डिस्पैच कर दिया जाता है और सूचना बाद में दी जाती है। डीएओ ने इसे अनुचित बताते हुए सख्त निर्देश दिया कि अब रैक डिस्पैच होने से कम से कम दो दिन पूर्व विभाग को इसकी सूचना अनिवार्य रूप से देनी होगी।
पीओएस मशीन के स्टॉक की जांच: खाद की जमाखोरी पकड़ने के लिए विभाग ने नई रणनीति बनाई है। क्षेत्रीय प्रबंधकों को निर्देश दिया गया है कि वे उन खुदरा विक्रेताओं की सूची सौंपें, जिनकी पीओएस मशीन में लंबे समय से उर्वरक का भंडार (स्टॉक) दिख रहा है। ऐसे विक्रेताओं से पूछताछ की जाएगी और उनके गोदामों का भौतिक सत्यापन भी होगा। टैगिंग की तो होगी कार्रवाई: किसानों और खुदरा विक्रेताओं की सबसे बड़ी समस्या टैगिंग की होती है। डीएओ ने स्पष्ट किया कि कंपनी या थोक विक्रेता द्वारा खुदरा दुकानदारों या किसानों को खाद के साथ जबरन कोई अन्य उत्पाद नहीं बेचा जाएगा। ऐसी शिकायत मिलने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में यह भी तय हुआ कि जल्द ही क्षेत्रीय प्रबंधकों, बीएओ और विक्रेताओं की संयुक्त बैठक बुलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जिले में उर्वरक की कोई कमी नहीं है। सभी अनुमंडल और प्रखंड कृषि पदाधिकारियों को निर्धारित दर पर बिक्री सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है।
यूरिया : 11,602.41 टन डीएपी : 2,656.8 टन एनपीके : 7,356.0 टन एसएसपी : 8,261.12 टन एमओपी : 358.0 टन
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