आबादी के हिसाब से दुनिया के 20 सबसे बड़े शहर, लिस्ट में भारत के भी कई नाम – India.Com

Published By: Nandan Singh | Updated: Jul 11, 2026, 1:50 PM
दुनिया तेजी से शहरों की ओर बढ़ रही है. आज करोड़ों लोग बेहतर शिक्षा, रोजगार और सुविधाओं की तलाश में बड़े शहरों का रुख कर रहे हैं. यही वजह है कि कई शहरों की आबादी लगातार बढ़ती जा रही है. वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू के 2026 के ताजा अनुमान के आधार पर एक सूची तैयार हुई है. इसमें दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले शहरों को शामिल किया गया है. यह आंकड़े बताते हैं कि किन शहरों पर सबसे ज्यादा जनसंख्या का दबाव है और जहां भविष्य में बेहतर आवास, परिवहन, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं की सबसे अधिक जरूरत होगी.
आज दुनिया की आधे से ज्यादा आबादी शहरों में रहती है और अनुमान है कि 2050 तक यह आंकड़ा करीब 70 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में शहरों का विस्तार और भी तेज होगा. बढ़ती आबादी के कारण नए घर, बेहतर सड़कें, मजबूत सार्वजनिक परिवहन, पार्क, अस्पताल और स्कूलों की जरूरत लगातार बढ़ रही है. इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए भी शहरों को पहले से ज्यादा तैयार होना पड़ेगा. यही वजह है कि वास्तुकला, नगर नियोजन और सरकारी नीतियों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है.
वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू के ताजा अनुमान के अनुसार, साल 2026 में शंघाई (चीन) लगभग 2.47 करोड़ की आबादी के साथ दुनिया का सबसे बड़ा शहर है. इसके बाद दिल्ली (भारत) करीब 2.34 करोड़ लोगों के साथ दूसरे स्थान पर है. तीसरे स्थान पर किन्शासा (डीआर कांगो), चौथे पर मुंबई, पांचवें पर बीजिंग, छठे पर कराची, सातवें पर शेन्जेन, आठवें पर ग्वांगझोउ, नौवें पर कानो (नाइजीरिया) और दसवें स्थान पर चेंगदू (चीन) है. यह सूची दिखाती है कि एशिया और अफ्रीका के शहर सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं.
इस लिस्ट में 11वें स्थान पर इस्तांबुल (तुर्किये) है, जबकि 12वें स्थान पर बेंगलुरु और 13वें पर कोलकाता शामिल हैं. इसके बाद लागोस (नाइजीरिया), लाहौर (पाकिस्तान), मॉस्को (रूस), चेन्नई (भारत), जकार्ता (इंडोनेशिया), तियानजिन (चीन) और 20वें स्थान पर जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका) आते हैं. इस सूची में भारत के चार बड़े शहर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता और चेन्नई शामिल हैं. इससे पता चलता है कि भारत में तेजी से शहरी विकास हो रहा है और बड़े शहर लगातार नए लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं.
सिर्फ कुल आबादी ही नहीं, बल्कि आबादी बढ़ने की रफ्तार भी काफी महत्वपूर्ण है. इस सूची में किन्शासा की वार्षिक वृद्धि लगभग 5.13 प्रतिशत है, जो सबसे अधिक है. इसके बाद कराची करीब 4.03 प्रतिशत और बेंगलुरु लगभग 4.1 प्रतिशत की वृद्धि के साथ तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. वहीं शंघाई, दिल्ली, ग्वांगझोउ, चेंगदू और लागोस जैसे शहरों में भी लगातार आबादी बढ़ रही है. तेजी से बढ़ती जनसंख्या का मतलब है कि इन शहरों में रोजगार, आवास, परिवहन और अन्य जरूरी सेवाओं की मांग भी लगातार बढ़ेगी, जिसके लिए बेहतर योजना बनानी होगी.
इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अलग-अलग देशों में शहरों की सीमाएं अलग तरीके से तय की जाती हैं. कहीं केवल नगर निगम क्षेत्र की आबादी गिनी जाती है, तो कहीं पूरे महानगर या आसपास के शहरी इलाकों को भी शामिल किया जाता है. इसी कारण कुछ बड़े महानगर, जैसे टोक्यो या जकार्ता, अन्य प्रकार की रैंकिंग में ऊपर दिखाई दे सकते हैं लेकिन इस सूची में उनकी स्थिति अलग हो सकती है. इसलिए इन आंकड़ों की तुलना करते समय यह समझना जरूरी है कि हर शहर की जनसंख्या एक जैसी परिभाषा के आधार पर नहीं मापी जाती.
यह रिपोर्ट केवल सबसे बड़े शहरों की सूची नहीं है, बल्कि यह बताती है कि भविष्य की दुनिया तेजी से शहरी होती जा रही है. बढ़ती आबादी के साथ शहरों को ऐसी योजनाएं बनानी होंगी जो सभी लोगों के लिए बेहतर जीवन सुनिश्चित करें. सस्ते और सुरक्षित घर, अच्छी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था, साफ वातावरण, पर्याप्त हरित क्षेत्र और रोजगार के अवसर आने वाले समय की सबसे बड़ी जरूरत होंगे. खासकर युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए शहरों को अधिक समावेशी, सुरक्षित और टिकाऊ बनाना जरूरी है. यही कारण है कि जनसंख्या के आंकड़े केवल संख्या नहीं, बल्कि भविष्य की योजना बनाने का महत्वपूर्ण आधार भी हैं. (Photos/Meta AI)
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