छोटे से बैक्टीरिया ने किया बड़ा कमाल, 130 दिन में बदल दिया जहरीले यूरेनियम का 95 प्रतिशत हिस्सा – India.Com

आपने शायद ही कभी सोचा होगा कि आंखों से न दिखने वाले छोटे से बैक्टीरिया भी एक दिन रेडियोधर्मी प्रदूषण जैसी बड़ी समस्या से निपटने में मदद कर सकते हैं. यह सुनने में काफी हैरान करने वाला लगता है, मगर वैज्ञानिकों की नई रिसर्च में कुछ ऐसा ही सामने आया है. जर्मनी के वैज्ञानिकों ने पाया है कि कुछ खास बैक्टीरिया पानी में घुले जहरीले यूरेनियम को एक स्थिर रासायनिक यौगिक में बदल सकते हैं. सबसे हैरानी की बात यह रही कि यह बदलाव करीब 130 दिनों में हुआ और इस दौरान पानी में मौजूद लगभग 95 प्रतिशत यूरेनियम बदल गया. अगर आने वाले समय में इस तकनीक पर और सफलता मिलती है, तो रेडियोधर्मी प्रदूषण वाले इलाकों की सफाई के लिए यह एक प्राकृतिक और सस्ता तरीका साबित हो सकता है.

यह शोध जर्मनी के हेल्महोल्ट्ज़ सेंटर ड्रेसडेन-रॉसेंडॉर्फ (HZDR), विस्मुट जीएमबीएच (Wismut GmbH) और स्पेन के यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रेनाडा के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया. प्रयोग के लिए जर्मनी की एक पुरानी यूरेनियम खदान से पानी लिया गया, जहां ऑक्सीजन की मात्रा बहुत कम होती है. प्रयोगशाला में भी इसी तरह का वातावरण बनाया गया. इसके बाद पानी में पहले से मौजूद बैक्टीरिया को ग्लिसरॉल दिया गया, जो उनके लिए भोजन का काम करता है. बैक्टीरिया सक्रिय हो गए और उन्होंने धीरे-धीरे पानी में घुले यूरेनियम को अपने आस-पास जमा करना शुरू कर दिया. करीब 130 दिनों बाद जांच में पता चला कि पानी में केवल लगभग 5 प्रतिशत यूरेनियम ही बचा था. वैज्ञानिकों ने आधुनिक तकनीकों की मदद से पुष्टि की कि यूरेनियम बैक्टीरिया की कोशिका की बाहरी परत यानी सेल वॉल में मौजूद था.
इस अध्ययन में वैज्ञानिकों को एक और चौंकाने वाली बात पता चली. आमतौर पर यूरेनियम दो प्रमुख रासायनिक अवस्थाओं, यानी वैलेंसी 4 और वैलेंसी 6 में पाया जाता है. लेकिन इस बार बड़ी मात्रा में वैलेंसी 5 वाला यूरेनियम मिला. वैज्ञानिकों के अनुसार यह रूप अब तक बहुत दुर्लभ और अस्थायी माना जाता था. आगे की जांच में पता चला कि यह यूरेनियम लोहे और ऑक्सीजन के साथ मिलकर FeU(V)O4 नाम का एक स्थिर रासायनिक यौगिक बना रहा था. इससे पहले वर्ष 2020 में क्रोएशिया की दूषित मिट्टी में इस यौगिक का पता चला था, लेकिन उस समय यह नहीं मालूम था कि इसे बनाने में बैक्टीरिया की भी भूमिका हो सकती है. इस नई खोज ने उस रहस्य से भी पर्दा उठाया है.

शोधकर्ताओं ने यह भी जांचा कि अगर इस नए यौगिक को ऑक्सीजन के संपर्क में लाया जाए, तो क्या होगा. आमतौर पर कई रासायनिक पदार्थ हवा के संपर्क में आने के बाद बदल जाते हैं, लेकिन यहां परिणाम अलग निकले. वैज्ञानिकों ने देखा कि FeU(V)O4 यौगिक न सिर्फ स्थिर बना रहा, बल्कि इसकी मात्रा और बढ़ गई. इसका मतलब है कि बैक्टीरिया द्वारा बनाया गया यह यौगिक लंबे समय तक सुरक्षित रह सकता है. हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी यह शुरुआती शोध है और यह समझने के लिए आगे और अध्ययन किए जाएंगे कि इस प्रक्रिया का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है.
इंफोग्राफिक/notebooklm

शोधकर्ताओं का मानना है कि यह पहली बार साबित हुआ है कि ग्लिसरॉल मिलने पर बैक्टीरिया पानी में घुले जहरीले यूरेनियम को एक स्थिर रासायनिक यौगिक में बदल सकते हैं. अब वैज्ञानिक इस पूरी जैविक और रासायनिक प्रक्रिया को और गहराई से समझने की कोशिश करेंगे. अगर भविष्य में यह तकनीक सफल साबित होती है, तो इसका इस्तेमाल यूरेनियम से दूषित पानी और मिट्टी की सफाई में किया जा सकता है. इससे पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नई और प्राकृतिक तकनीक विकसित होने की उम्मीद है. यह शोध Nature Communications जर्नल में प्रकाशित हुआ है.
यह नई रिसर्च किस बारे में है?
यह रिसर्च बताती है कि कुछ खास बैक्टीरिया पानी में घुले जहरीले यूरेनियम को एक स्थिर रासायनिक यौगिक में बदल सकते हैं.
बैक्टीरिया ने यूरेनियम को बदलने में कितना समय लिया?
शोध के अनुसार बैक्टीरिया ने करीब 130 दिनों में यह प्रक्रिया पूरी की.
130 दिनों बाद कितना यूरेनियम बचा था?
130 दिनों के बाद पानी में घुले यूरेनियम का केवल करीब 5 प्रतिशत हिस्सा बचा था, यानी लगभग 95 प्रतिशत यूरेनियम बदल चुका था।
बैक्टीरिया को क्या खिलाया गया था?
वैज्ञानिकों ने बैक्टीरिया को ग्लिसरॉल दिया, जो उनके लिए भोजन यानी कार्बन स्रोत का काम करता है.
ग्लिसरॉल क्या होता है?
ग्लिसरॉल पौधों और जानवरों की वसा (Fat) का एक सामान्य घटक है. प्राकृतिक रूप से यह लकड़ी के सड़ने जैसी प्रक्रियाओं में भी बन सकता है.
यह प्रयोग कहां किया गया?
यह प्रयोग जर्मनी की एक पुरानी यूरेनियम खदान से लिए गए पानी पर किया गया.
प्रयोग ऑक्सीजन रहित वातावरण में क्यों किया गया?
क्योंकि खदान की गहराई में ऑक्सीजन बहुत कम होती है. वैज्ञानिक प्राकृतिक परिस्थितियों जैसी स्थिति बनाना चाहते थे.
यूरेनियम बैक्टीरिया के किस हिस्से में मिला?
वैज्ञानिकों ने पाया कि यूरेनियम बैक्टीरिया की कोशिका की बाहरी दीवार में मौजूद था.
वैज्ञानिकों को सबसे बड़ा आश्चर्य किस बात से हुआ?
उन्हें बड़ी मात्रा में वैलेंसी-5 वाला यूरेनियम मिला, जिसे पहले बहुत दुर्लभ और अस्थायी माना जाता था.
बैक्टीरिया ने कौन-सा नया यौगिक बनाया?
शोध में FeU(V)O4 नाम का स्थिर रासायनिक यौगिक बनने की पुष्टि हुई.
इस खोज का सबसे बड़ा फायदा क्या हो सकता है?
भविष्य में इसका उपयोग यूरेनियम से प्रदूषित पानी और मिट्टी की सफाई में किया जा सकता है.
क्या यह तकनीक अभी इस्तेमाल के लिए तैयार है?
नहीं, वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी और शोध की जरूरत है. फिलहाल यह एक शुरुआती लेकिन महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खोज है.
बैक्टीरिया यूरेनियम को कैसे बदलते हैं?
वे अपने चयापचय (Metabolism) के दौरान यूरेनियम की रासायनिक अवस्था बदलते हैं और उसे एक अधिक स्थिर यौगिक में परिवर्तित कर देते हैं.
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नंदन सिंह ने पत्रकारिता में करियर की शुरुआत साल 2015 में ईनाडु डिजिटल यानी ईटीवी (हैदराबाद) से की. यहां इन्होंने बतौर कॉपी राइटर करीब 10 महीनों तक काम किया. सीखने … और पढ़ें
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