ईरान के लिए ढाल, दुनिया के तेल कारोबार की अहम कड़ी… क्या है केशम द्वीप की पूरी कहानी? – AajTak

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अमेरिका ने 2 नवंबर को ईरान के केशम द्वीप पर हमला किया. यह कार्रवाई अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से ठीक पहले हुई. अमेरिका में 3 नवंबर को वोटिंग होनी है. अमेरिकी अधिकारियों ने हमले की पुष्टि की है. उनके मुताबिक, इस कार्रवाई का मकसद ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना था, जिनसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों को खतरा हो सकता है. ईरान के सरकारी मीडिया ने भी केशम द्वीप पर धमाकों की खबर दी. 
अमेरिका के इस हमले के बीच सवाल ये उठता है कि, केशम द्वीप इतना खास क्यों है? अमेरिका ने इसे निशाना क्यों बनाया? इसकी वजह समझने के लिए पहले इसकी लोकेशन जानना जरूरी है.
कहां है केशम द्वीप?
दरअसल, केशम ईरान का सबसे बड़ा द्वीप है. यह फारस की खाड़ी में मौजूद है. इसके एक तरफ ईरान की मुख्य जमीन है. दूसरी तरफ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है. यह द्वीप ईरान के बंदर अब्बास शहर के पास है. इसकी लंबाई करीब 135 किलोमीटर है. इसका आकार तीर जैसा दिखाई देता है. 
ईरान के केशम द्वीप पर अमेरिका का हमला। अमेरिकी अधिकारी ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को दी जानकारी। #ATVideo #Iran #USA #Super8 | @poojasharma_ps_ https://t.co/Sajmc6fFkz
केशम की सबसे बड़ी ताकत इसकी लोकेशन है. यहां से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के समुद्री रास्ते पर नजर रखी जा सकती है. यह रास्ता फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है. दुनिया के तेल कारोबार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है. सऊदी अरब, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों का तेल इसी रास्ते से बाहर जाता है. भारत, चीन और जापान जैसे देश भी इस रास्ते से आने वाले तेल पर निर्भर हैं.
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक, 2025 में हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल तेल और पेट्रोलियम उत्पाद इस रास्ते से गुजरे. यह दुनिया के समुद्री रास्तों से होने वाले तेल व्यापार का करीब 25 फीसदी है. इसलिए यहां तनाव बढ़ने का असर कई देशों पर पड़ सकता है. 
ईरान के केशम द्वीप पर अमेरिका का हमला, संवाददाता अशरफ वानी दे रहे हैं अधिक जानकारी। #ATVideo #Iran #USA | @journoashutosh | @ashraf_wani https://t.co/YgMutEQugg
जमीन के नीचे मिसाइल ठिकाने, समुद्र में तेज रफ्तार नावें
केशम द्वीप सिर्फ अपनी लोकेशन के लिए नहीं जाना जाता. यहां ईरान की सैन्य मौजूदगी भी है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, द्वीप पर जमीन के नीचे मिसाइल ठिकाने बनाए गए हैं. इन्हें ‘मिसाइल सिटी’ भी कहा जाता है.
यहां तटीय रडार और नौसैनिक ठिकाने भी मौजूद हैं. ईरान की तेज रफ्तार हमलावर नावें भी इस इलाके में काम करती हैं. इनकी मदद से समुद्र में जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है. जरूरत पड़ने पर इन नावों और मिसाइलों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. 
हालांकि केशम की पहचान सिर्फ मिसाइलों और सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है. यह द्वीप अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए भी मशहूर है. यहां रंग-बिरंगी चट्टानें, गुफाएं और मैंग्रोव के जंगल हैं. स्टार वैली और चाकोह घाटी यहां के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं. यहां नमक की एक बड़ी गुफा भी है. द्वीप के आसपास कई तरह के समुद्री जीव और पक्षी पाए जाते हैं.
यह भी पढ़ें: केशम द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान कैसे देगा जवाब… कौन से US Base पर खतरा?
ईरान ने 1989 में केशम को मुक्त व्यापार क्षेत्र के तौर पर विकसित करना शुरू किया था. इसका मकसद कारोबार, उद्योग और पर्यटन को बढ़ावा देना था. यानी यह द्वीप आर्थिक रूप से भी ईरान के लिए अहम है.  
केशम द्वीप के आसपास तनाव बढ़ने का असर सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा. अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही रुकती है, तो तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. भारत भी इस रास्ते से आने वाले तेल पर निर्भर है. ऐसे में सप्लाई बाधित होने पर देश में तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. यही वजह है कि केशम द्वीप पर होने वाली हर सैन्य कार्रवाई पर दुनिया की नजर रहती है.
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