लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार चालू पेराई सीजन के लिए गन्ने के राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) में बढ़ोतरी करने पर विचार कर रही है। संभावना है कि दीपावली से पहले नई दरों की घोषणा की जा सकती है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों और गन्ना किसानों की मांगों को देखते हुए सरकार इस दिशा में कदम उठा सकती है। यह जानकारी हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में दी गई है।
गन्ने के मूल्य में प्रस्तावित बढ़ोतरी को लेकर किसान संगठनों और चीनी मिल मालिकों के बीच मतभेद सामने आए हैं। किसानों की मांग है कि मौजूदा 400 रुपये प्रति क्विंटल की दर में 100 रुपये की बढ़ोतरी कर इसे 500 रुपये किया जाए। वहीं, चीनी मिल मालिक इस बढ़ोतरी का विरोध कर रहे हैं और मौजूदा दरों को ही जारी रखने की मांग कर रहे हैं।
इस मुद्दे पर गुरुवार को मुख्य सचिव एस.पी.गोयल की अध्यक्षता में राज्य परामर्शित मूल्य अनुशंसा समिति की बैठक हुई। बैठक में किसान प्रतिनिधियों ने गन्ने का मूल्य बढ़ाने की मांग जोरदार तरीके से रखी। वहीं, चीनी मिल मालिकों ने बढ़ती उत्पादन लागत और परिचालन खर्च का हवाला देते हुए उद्योग को आर्थिक स्थिति संभालने के लिए समय देने की मांग की।
उत्तर प्रदेश चीनी मिल संघ के एक पदाधिकारी ने बताया कि, उद्योग की ओर से सरकार से मौजूदा दरों को बरकरार रखने का आग्रह किया गया है। मिल मालिकों का कहना है कि गन्ने के दाम में लगातार हो रही बढ़ोतरी और परिचालन खर्च बढ़ने से उनकी आर्थिक स्थिति पर दबाव पड़ रहा है। इसके अलावा चीनी की बिक्री कीमतों में उत्पादन लागत के अनुपात में लगातार वृद्धि नहीं हुई है।
भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा कि, उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती किसानों के लिए आर्थिक रूप से कठिन होती जा रही है। उन्होंने बताया कि गन्ना उत्पादन की लागत 400 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक हो गई है। ऐसे में किसानों को राहत देने के लिए सरकार को गन्ने के SAP में कम से कम 100 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी करनी चाहिए।
तीन चरणों में होती है गन्ना मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया
गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य निर्धारित करने के लिए संबंधित पक्षों के साथ तीन चरणों में बैठकें आयोजित की जाती हैं। पहली बैठक चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव और गन्ना आयुक्त की अध्यक्षता में होती है। दूसरी बैठक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित की जाती है, जबकि अंतिम बैठक संबंधित विभाग के मंत्री के नेतृत्व में होती है। चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने बताया कि सभी संबंधित पक्षों की राय जानने के लिए अंतिम बैठक जल्द आयोजित की जाएगी। यह बैठक दीपावली से पहले भी हो सकती है। बैठक के बाद यदि सरकार गन्ने का मूल्य बढ़ाने का निर्णय लेती है, तो प्रस्ताव मंत्रिमंडल के समक्ष भेजा जाएगा। मंत्री ने मथुरा से फोन पर हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत करते हुए संकेत दिया कि किसानों की मांगों को देखते हुए SAP में बढ़ोतरी की संभावना है।
प्रदेश के 47 लाख से अधिक गन्ना किसानों की नजर फैसले पर
उत्तर प्रदेश में 47 लाख से अधिक गन्ना किसान चीनी मिलों को गन्ने की आपूर्ति करते हैं। गन्ना विभाग के अनुसार, चालू सीजन में राज्य में 28.14 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती की गई है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है, जबकि चीनी उत्पादन के मामले में महाराष्ट्र पहले स्थान पर है।
वर्ष 2025-26 के पिछले पेराई सीजन में SAP में संशोधन करते हुए जल्दी पकने वाली गन्ने की किस्मों का मूल्य 30 रुपये बढ़ाकर 400 रुपये प्रति क्विंटल किया गया था। सामान्य किस्मों का मूल्य भी 30 रुपये बढ़ाकर 390 रुपये प्रति क्विंटल किया गया था। वहीं, अस्वीकृत किस्मों का मूल्य 355 रुपये प्रति क्विंटल पर यथावत रखा गया था। अब सरकार के सामने किसानों की गन्ना मूल्य बढ़ाने की मांग और चीनी मिलों की मौजूदा दरें बरकरार रखने की मांग के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। दीपावली से पहले होने वाला निर्णय प्रदेश के लाखों गन्ना किसानों और चीनी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


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