औरैया: ट्रैक्टर-ट्रॉली में ट्रेन का पहिया लगाकर दौड़ा रहा था, ARTO ने काटा 10 लाख से अधिक चालान – Aaj Tak

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यूपी के औरैया से हैरान करने वाला मामला सामने आया, जहां ट्रैक्टर-ट्रॉली में रेलगाड़ी के पहिये लगाकर उसे दौड़ाया जा रहा था. जब ARTO की नजर इसपर पड़ी तो उन्होंने ट्रैक्टर-ट्रॉली की चेकिंग की. पता चला कि टैक्टर का रजिस्ट्रेशन कृषि कार्य हेतु था, लेकिन ट्रॉली का तो रजिस्ट्रेशन ही नहीं था. इसपर अधिकारी ने ट्रैक्टर-ट्रॉली का 10 लाख रुपये से ज्यादा का चालान काट दिया. 
दरअसल, पूरा मामला औरैया के नेशनल हाइवे का है, जहां पर ARTO सुदेश तिवारी किसी ऑफिशियल काम से जा रहे थे, तभी उनकी नजर एक ट्रैक्टर पर पड़ी जिसमें ट्रॉली लगी हुई थी. लेकिन उसकी बनावट थोड़ी अजीब थी. ऐसे में ARTO द्वारा ट्रैक्टर को रुकवाकर उसके कागजात मांगे गए. जांच में पता चला कि ट्रैक्टर का रजिस्ट्रेशन राजस्थान का था. ट्रैक्टर कृषि कार्य मे रजिस्टर्ड था लेकिन ट्रॉली का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं था. 
जब वाहन को पीछे साइड से जाकर देखा गया तो अधिकारी दंग रह गए क्योंकि ट्रॉली में ट्रेन के पहिये लगे थे. ट्रॉली का वजन एवं उसकी बनावट से बहुत अधिक था. ऐसे में ARTO के द्वारा इस वाहन का 10 लाख 6 हजार रुपये का चालान काट दिया गया. 
पूछताछ में पता चला कि यह ट्रॉली एक रेलवे ठेकेदार के यहां काम पर लगी थी. इसके लिए वाहन मालिक को 85 हजार रुपये हर महीने  मिलता था. ये मानक विहीन ट्रैक्टर-ट्रॉली पिछले 5 साल से सड़कों पर दौड़ रही थी, जिसका वजन 12 चक्का ट्रक के बराबर बताया जा रहा है. 
इस पूरे मामले में एआरटीओ सुदेश तिवारी ने बताया कि पिछले हफ्ते मैं एक शासकीय कार्य से NH-19 यानि बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर जा रहा था. इसी दौरान मैंने एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को देखा जिसका साइज काफी बड़ा था. ये देखकर मुझे संदेह हुआ तो मैंने उसको रुकवा लिया. पता चला कि ट्रैक्टर राजस्थान के नागौर में रजिस्टर्ड है, जबकि ट्रॉली अनरजिस्टर्ड है. जब उसको चारों तरफ से देखा तो मालूम चला कि ट्रॉली में दो बड़े साइज के टायर लगे थे, उसके साथ-साथ दो ट्रेन के पहिये भी लगे थे. यह ट्रॉली खासतौर पर बनाई गई थी जो कि रेल की पटरियों पर चलती थी और गिट्टी को रेल की पटरियों के बीच बिछाती थी. इस गाड़ी का ड्राइवर कोई कागज नहीं दिखा पाया इसलिए उसका चालान काटा गया. 
बकौल ARTO- आश्चर्य की बात यह है कि राजस्थान में यह ट्रैक्टर रजिस्टर्ड है एग्रीकल्चर पर्पज के लिए टैक्स फ्री और पिछले 5 साल से उत्तर प्रदेश में व्यवसाय कर रहा है. इस तरह के जो ट्रैक्टर-ट्रॉली हैं वह किसी गवर्नमेंट अप्रूव्ड एजेंसी या मैन्युफैक्चरर के द्वारा नहीं बनाए  गए हैं. यह देशी उद्योग के लिए ऐसे ही बना लिए जाते हैं. ऐसे वाहन रोड सेफ्टी के लिए बहुत ही खतरनाक हैं.  
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