हरनौत के झंडू ने कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता कांस्य पदक पैरा पावरलिफ्टिंग के हैवी वेट वर्ग में रहे तीसरे स्थान पर स्कॉटलैंड के ग्लासगो में लहराया तिरंगा झंडा भारत के लिए खोला पदक का खाता, प्रधानमंत्री को दी बधाई उनकी सफलता से हरनौत में जश्न का माहौल परिवार को मिल रहे बधाई संदेश, दिनभर बजता रहा फोन फोटो : झंडू01-पदक जीतने के बाद झंडू। झंडू02-हरनौत में एनएच-20 के किनारे रेहड़ी पर सब्जी बेचता झंडू। (फाइल फोटो) झंडू03-हरनौत में शनिवार को सब्जी दुकान पर जाकर माता-पिता को बधाई देते कोच कुंदन कुमार पांडेय व अन्य। बिहारशरीफ, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। कभी सब्जी बेचने वाला और ई-रिक्शा चलाने वाला हरनौत का लाल झंडू ने इस बार पूरे देश का गर्व सिर से ऊंचा कर दिया है। सात समंदर पार स्कॉटलैंड के ग्लासगो में भारतीय तिरंगा लहरा दिया है। उसने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए पदक का खाता खोल दिया है। पैरा पावर लिफ्टिंग के हैवी वेट वर्ग में तीसरे स्थान पर रहते हुए देश के लिए कांस्य पदक हासिल किया। प्रधानमंत्री मोदी ने उसकी सफलता पर सोशल मीडिया पर बधाई दी है। उनकी सफलता से हरनौत में जश्न का माहौल है। परिवार को दिनभर बधाई संदेश मिलते रहे। फोन लगातार बजते रहे। बाजार में मिलने वाले लोगों ने परिवार को बधाई दी। झंडू के माता-पिता अभी भी हरनौत बाजार में एनएच-20 के किनारे रेहड़ी पर आलू-प्याज बेचकर अपने परिवार का गुजार करते हैं।
रातभर जगकर परिणाम का करते रहे इंतजार : झंडू के बड़े भाई कुंदन कुमार ने बताया कि झंडू ने मुकाबले से पहले फोन किया था। उसने बताया था कि रात 10 बजे से मुकाबला शुरू होगा। हालांकि, रात को दो बजे मुकाबला शुरू हुआ। परिवार के लोग परिणाम जानने के लिए रातभर जागते रहे। मुकाबले से पहले उसने फोन कर मां का आशीर्वाद लिया था। मां ने पदक जीतकर आने का आशीर्वाद दिया था। मेडल जीतने के बाद उसने मां को फोन कर बताया कि आपके आशीर्वाद से पदक जीत गया हूं।
काफी संघर्ष के बाद मिली सफलता : झंडू चार भाइयों व तीन बहनों में सबसे छोटा है। एक भाई का निधन हो गया है। परिवार मूल रूप से सबनहुआ-डीह का रहने वाला है। अब हरनौत में ही किराये पर रहता है। पहले उसका नाम झुन्नू था। विकलांग होने की वजह से लोग उसे झंडू या झंडुआ पुकारने लगे। उसने सब्जी की दुकान पर पिता का हाथ बंटाया करता था। बाद में अपना खर्च चलाने के लिए ई-रिक्शा चलाया। एक इवेंट में भाग लेने के लिए उसने अपना रिक्शा तक बेच दिया। बिना किसी सहायता के इस सफलता के पीछे उसके संघर्ष की एक लंबी दास्तां है। पिता रामानंद पासवान और माता कमला देवी रोज की तरह शनिवार को भी दुकान में बैठे थे।
कोच व खिलाड़ियों ने दी बधाई : शनिवार को उनके कोच व नालंदा पारा स्पोटर्स एसोसिएशन के सचिव कुंदन कुमार पांडेय व कई खिलाड़ियों ने शनिवार को उनकी दुकान पर पहुंचकर उन्हें बधाई दी। उन्हें मिठाई खिलायी। कोच ने कहा कि यह पूरे नालंदा ही नहीं राज्य और देश के लिए गौरव की बात है। उसकी सफलता अन्य खिलाड़ियों को भी प्रेरणा देगी। बधाई देने वालों में एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार सिन्हा, प्रमोद कुमार, सतनाम कबीर, ज्ञानेश कुमार, रवि कुमार आदि शामिल हैं।
चार साल की उम्र में हुआ था पोलियो : चार साल की उम्र में उसे पोलियो हो गया था। इससे कमर के नीचे शरीर का हिस्सा प्रभावित हो गया। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। काम के साथ ही वह जिम जाने लगा। जिम के ट्रेनर ने उन्हें शुरुआती प्रशिक्षण दिया। वर्ष 2016 में वह कोच कुंदन कुमार पांडेय को मिला। उनकी देखरेख में उसने 2019 में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में पहला पदक जीता। वर्ष 2024 में साई (भारतीय खेल प्राधिकरण) में चयन होने के बाद वह पूरी तरह से प्रोफेशनल खिलाड़ी बना। गुजरात के गांधीनगर में वह प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है।
झंडू की उपलब्धियां : 2021 : कोलकाता में सीनियर राष्ट्रीय पैरालिफ्टिंग चैम्पियनशिप में कांस्य पदक। 2025 : नोएडा में सीनियर राष्ट्रीय पैरालिफ्टिंग चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक। नई दिल्ली में खेलो इंडिया पैरा गेम्स में स्वण पदक। चीन में वर्ल्ड पैरा पावरलिफ्टिंग में कांस्य पदक। काहिरा में वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग में देश का प्रतिनिधित्व किया। 2026 : सीनियर राष्ट्रीय पैरा पावरलिफ्टिंग चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक। बैंकॉक में एशिया-ओशिनिया ओपन पैरा पावरलिफ्टिंग में कांस्य पदक और अब कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक। (बिहारशरीफ से अमित कुमार)
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