क्या होता है डिमार्श? होर्मुज में जहाज पर हमले के बाद भारत ने अमेरिका के सामने उठाया सख्त कदम – Jagran

ओमान तट पर जहाज घटना के बाद भारत ने अमेरिका को 'डिमार्श' सौंपकर कड़ा विरोध जताया है। यह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का एक औपचारिक लिखित या मौखिक हथियार है, …और पढ़ें
भारत-अमेरिका।
भारत ने ओमान घटना पर अमेरिका को डिमार्श सौंपा।
यह कूटनीतिक विरोध नागरिकों की सुरक्षा पर केंद्रित है।
अमेरिका से घटना पर आधिकारिक स्पष्टीकरण की मांग की गई।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति की दुनिया में इन दिनों एक शब्द खूब चर्चा में है ‘डिमार्श’। अब इसके चर्चा के कारण को ऐसे समझिए कि हाल ही में ओमान के तट के पास वाणिज्यिक जहाज के साथ हुई गंभीर घटना के बाद भारत ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। भारत सरकार ने इस मामले को लेकर दुनिया के सबसे शक्तिशाली माना जाने वाला देश अमेरिका को औपचारिक ‘डिमार्श’ सौंपा है।
भारत ने दिल्ली में अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत को बकायदा तलब किया और अपनी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। इस कदम के बाद कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। ऐसे में सवाल ये खड़ा होता है कि आखिर डिमार्श होता क्या है? अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में इसका क्या स्थान होता है और इसका प्रभाव कैसा होता है? आइए यहां समझते हैं।
सबसे पहले समझिए: क्या होता है डिमार्श?
कूटनीति की भाषा में ‘डिमार्श’ एक बेहद औपचारिक और आधिकारिक जरिया है। इसका प्रभाव ऐसे समझिए कि जब कोई देश किसी दूसरे देश की किसी कार्रवाई, नीति या किसी घटना से असहमत होता है, तो वह इसके जरिए अपनी चिंता, कड़ा विरोध, आपत्ति या मांग आधिकारिक रूप से दर्ज कराता है।
बता दें कि यह कोई आम बातचीत या सामान्य शिकायत नहीं होती। यह एक लिखित या मौखिक संदेश होता है, जिसे संबंधित देश के विदेश मंत्रालय के जरिए दूसरे देश के राजदूत को सौंपा जाता है।
समझने वाली बात यह है कि इसका उपयोग तब किया जाता है जब कोई घटना बहुत गंभीर हो और सरकार चाहती हो कि उसका एक आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार हो, ताकि सामने वाले देश को लिखित में जवाब या स्पष्टीकरण देना ही पड़े।
ओमान के समुद्र तट के पास हुई जहाज की घटना में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बड़ा खतरा पैदा हो गया था। भारत सरकार ने इसे बेहद गंभीरता से लिया है। इस डिमार्श के जरिए भारत ने अमेरिका के सामने साफ कर दिया है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं करेगा। भारत ने अमेरिकी अधिकारियों से इस घटना पर विस्तृत स्पष्टीकरण और जवाबदेही की मांग की है।
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर डिमार्श जारी करने के गहरे मायने होते हैं। इसका सीधा संकेत यह होता है कि संबंधित मुद्दा अब अनौपचारिक बातचीत से निकलकर आधिकारिक कूटनीतिक स्तर पर पहुंच चुका है। इसे टाला नहीं जा सकता। ऐसे में जब भारत ने अमेरिका को डिमर्श सौंपा तब अब अमेरिकी सरकार की जिम्मेदारी है कि वो अब इस पूरे मामले की जिम्मेदारी तय करें। 
इस बात को ऐसे समझिए कि भारत सरकार की तरफ से डिमर्श सौंपे जाने के बाद अब अमेरिका को इस पूरी घटना पर अपनी जांच रिपोर्ट, स्पष्टीकरण या सहयोग की आधिकारिक जानकारी भारत को देनी ही होगी। यह प्रक्रिया दोनों देशों के बीच संवाद को एक नया मोड़ देती है। अमेरिका से जो भी जवाब मिलेगा, उसी के आधार पर भारत अपनी भविष्य की रणनीति और कार्रवाई तय करेगा।
कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि डिमार्श का उद्देश्य किसी देश के साथ युद्ध या सीधा टकराव पैदा करना नहीं होता। बल्कि, इसका असली मकसद एक व्यवस्थित और कानूनी दायरे में रहकर कूटनीतिक तरीके से समाधान निकालना होता है। भारत का यह कदम दिखाता है कि वह अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर पूरी जिम्मेदारी और मजबूती के साथ अपने हितों की रक्षा करना जानता है।

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