फतेहपुर। दोआबा में खसरा (मिजिल्स) की निगरानी व्यवस्था संसाधनों के अभाव से जूझ रही है। संदिग्ध मरीजों के रक्त नमूने लेने वाली जांच किटों का स्टाक लगभग खत्म हो चुका है और स्वास्थ्य विभाग के पास फिलहाल सिर्फ 10 किट ही शेष बची हैं। वहीं नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला तक भेजने के लिए परिवहन मद में धन की कमी भी सर्विलेंस गतिविधियों में बाधा बन रही है। किटों की कमी और नमूनों के परिवहन में आ रही दिक्कतें जिले के लिए आ रही हैं। इतना ही नहीं प्रदेश के कई जनपदों से ऐसी शिकायतें मिलने के बाद परिवार कल्याण विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है।
महानिदेशक परिवार कल्याण ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक को पत्र भेजकर सर्विलेंस गतिविधियों के लिए जरूरी सैंपल कलेक्शन किट उपलब्ध कराने और सैंपल ट्रांसपोर्टेशन के लिए पर्याप्त वित्तीय प्रबंधन सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। पत्र में कहा गया है कि आईडीएसपी के माध्यम से संचालित सर्विलेंस गतिविधियां किट और परिवहन संबंधी समस्याओं के कारण प्रभावित हो रही हैं। नोडल अधिकारी डा. केके सिंह ने बताया कि मौजूदा समय में जनपद में सिर्फ 10 जांच किट बची हैं। नई किटों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही नई किटें उपलब्ध हो जाएंगी। फिलहाल उपलब्ध संसाधनों के सहारे संदिग्ध बच्चों के नमूने एकत्र कर सर्विलेंस कार्य संचालित किया जा रहा है।
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