पैरा एशियाई खेल इंट्रो : भारतीय खिलाड़ियों ने पैरा एशियाई खेलों के पहले ही दिन झंडे गाड दिए। निशानेबाज मोना ने स्वर्णिम शुरुआत दिलाई। एथलीटों ने इस सिलसिले को बरकरार रखते हुए तीन और पीले तमगे दिलाए। सोमवार को भारत ने चार स्वर्ण सहित कुल 11 पदक जीते। इससे भारत तालिका में चौथे स्थान पर है। तीन स्पर्धाओं में दो-दो भारतीय शीर्ष दो स्थानों पर रहे।
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अवनि को 0.4 अंकों से पछाड़ मोना बनीं चैंपियन
नागोया, एजेंसी। दो बच्चों की मां 38 वर्षीय निशानेबाज मोना अग्रवाल ने सोमवार पैरा एशियाई खेलों में खेलों के रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीतकर भारत को स्वर्णिम शुरुआत दिलाई। फाइनल मुकाबला जयपुर की दो भारतीय निशानेबाजों के बीच था। मोना गत चैंपियन अवनि लेखरा को पछाड़कर महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल (एसएच1) में चैंपियन बनीं। अवनि को रजत से संतोष करना पड़ा।
पेरिस पैरालंपिक की कांस्य पदक विजेता मोना ने छठे स्थान से वापसी करते हुए 250.0 अंकों के साथ शीर्ष पर रही। उन्होंने दो बार की पैरालंपिक चैंपियन अवनि ( 249.6) को महज 0.4 अंक से पछाड़ा। दोनों निशानेबाजों के बीच मुकाबला 24 शॉट के फाइनल के आखिरी शॉट तक चला। निर्णायक शॉट से पहले मोना के 239.1 अंक थे। अवनि 239.2 अंक के साथ उनसे 0.1 अंक आगे थीं। मोना ने आखिरी शॉट में शानदार 10.8 अंक हासिल किए जबकि अवनि 10.5 अंक ही जुटा सकीं। अवनि ने रजत के साथ भारत के लिए 2028 लॉस एंजिलिस पैरालंपिक के लिए दूसरा कोटा स्थान भी हासिल कर लिया। मोना ने पिछले महीने विश्व निशानेबाजी पैरा स्पोर्ट (डब्ल्यूएसपीएस) चैंपियनशिप में कोटा हासिल किया था। दक्षिण कोरिया की युनरी ली (227.9) ने कांस्य पदक जीता। एसएच1 वर्ग निचले अंगों में विकलांगता वाले निशानेबाजों के लिए है। मोना अब 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन स्पर्धा में हिस्सा लेंगी।
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::: कोटस :::
‘मैं सिर्फ एक बात जानती थी कि मुझे अपनी प्रक्रिया लगातार दोहरानी है और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है। मुझे विश्वास था कि अगर मैं ऐसा करती रही तो फिर से शीर्ष पर पहुंच सकती हूं। इसलिए जब मैं पीछे चल रही थी और बाहर होने की कगार पर थी, लेकिन तब मैंने ज्यादा नहीं सोचा। मैंने अपनी प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखा, शांत रही और खुद पर विश्वास करती रही।’ -मोना अग्रवाल
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निषाद की पहली स्पर्धा में स्वर्णिम छलांग
छह साल की उम्र में घास काटने वाली मशीन से दहिना हाथ कटने के बाद भी हिमाचल प्रदेश अंब उपमंडल के निषाद कुमार ने हार नहीं मानी। उन्होंने पैरा एथलेटिक्स में करियर बनाने की ठानी और अपनी जिद से नित नई बुलंदियां हासिल करते गए। 27 वर्षीय निषाद सोमवार को पहली बार लंबी कूद में भाग्य आजमाया और स्वर्णिम छलांग लगाकर अपने सुनहरे करियर में एक और अध्याय जोड़ दिया। वह लंबी कूद की टी47 स्पर्धा में अपने तीसरे और पांचवें दोनों प्रयासों में 7.11 मीटर की छलांग लगाकर शीर्ष पर रहे।
उज्बेकिस्तान के ओमादबेक खासानोव (6.99 मीटर) ने रजत और श्रीलंका के मोहम्मदु सफरान (6.55 मीटर) ने कांस्य पदक जीता। निषाद ने पिछले खेलों में ऊंची कूद की टी47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। दो बार के पैरालंपिक रजत पदक विजेता निषाद अभी अपनी पसंदीदा स्पर्धा ऊंची कूद टी47 में भी भाग लेंगे। टी47 श्रेणी में वह खिलाड़ी भाग लेते हैं जिनके ऊपरी हिस्से के अंग अपंग होते हैं।
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जूडो : कोकिला ने रजत, कपिल ने कांसा जीता
नागोया। भारत के दृष्टिबाधित जूडो खिलाड़ियों कोकिला (जे2-52 किलो) ने रजत और कपिल परमार (जे1-70 किलो) ने कांस्य पदक जीते। हांगझोउ एशियाई पैरा खेलों की कांस्य पदक विजेता कोकिला को फाइनल में किर्गिस्तान की ऐबिके उलानबेक काइजी ने 21 सेकंड में इप्पोन हासिल करके मात दे दी। जूडो में इप्पोन सबसे अधिक अंक देने वाला मूव है, जिससे मुकाबला तुरंत जीत लिया जाता है।
कोकिला ने सेमीफाइनल में चीन की यी लियू को 1-0 से हराया था। हरियाणा के जींद जिले के कसून गांव की रहने वाली कोकिला ने 2024 पेरिस पैरालंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था। पिछले खेलों के रजत विजेता कपिल को सेमीफाइनल में इंडोनेशिया के जुनेदी के खिलाफ 0-1 से हार मिली। इससे उन्होंने कांस्य पदक के मुकाबले में जगह बनाई। इसमें उन्होंने इंडोनेशियाई खिलाड़ी अहनाफ रफली शिदकी के खिलाफ एक इप्पोन हासिल करके 1-0 से जीत दर्ज की। यह मुकाबला एक मिनट से कुछ अधिक समय तक चला। दृष्टिबाधित खिलाड़ियों की जूडो स्पर्धाएं जे1 और जे2 वर्गों में आयोजित होती हैं। जे2 वर्ग के खिलाड़ियों में दृष्टिबाधिता होती है, लेकिन आमतौर पर उनकी देखने की क्षमता जे1 वर्ग के खिलाड़ियों से बेहतर होती है। जे1 वर्ग में पूरी तरह दृष्टिहीन खिलाड़ी भी शामिल होते हैं।
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टेबल टेनिस : भावना, प्राची और सोनलबेन के पदक पक्के
नागोया। पैरालंपिक की रजत पदक विजेता भाविना पटेल, प्राची पांडे और सोनलबेन ने टेबल टेनिस की अपनी-अपनी स्पर्धाओं के सेमीफाइनल में पहुंचकर पदक पक्के कर लिए। राष्ट्रमंडल खेलों की पूर्व स्वर्ण पदक विजेता भाविना ने वर्ग चार-पांच के क्वार्टर फाइनल में चीन की झांग मियाओ को 3-1 (8-11, 11-6, 11-1, 11-6) से हराया।
गांधीनगर स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) के उत्कृष्टता केंद्र में प्रशिक्षण लेने वाली प्राची ने वर्ग छह के मुकाबले में थाईलैंड की कानोकपॉर्न फाथुमचाई को 11-5, 11-4, 11-13, 12-10 से हराया। प्राची न्यूरो-डिजेनेरेटिव बीमारी से पीड़ित हैं। वह ग्रुप ए में दूसरे स्थान पर रहीं। वर्ग छह में ऐसे खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा करते हैं जिनके दोनों हाथों और पैरों में गंभीर शारीरिक अक्षमता होती है और जो खड़े होकर खेलते हैं। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से एमटेक की पढ़ाई पूरी कर चुकीं प्राची फाइनल में जगह बनाने के लिए मंगलवार को इराक की नजला अल-दय्येनी से भिड़ेंगी।
सोनलबेन ने वर्ग तीन के क्वार्टर फाइनल में थाईलैंड की दरारत असायुत को 3-1 (11-7, 8-11, 11-5, 11-5) से पराजित किया। वर्ग तीन में व्हीलचेयर पर बैठकर खेलने वाले ऐसे खिलाड़ी शामिल होते हैं जिनका बैठने के दौरान संतुलन कमजोर होता है। धड़ पर नियंत्रण सीमित होता है जबकि बांह और हाथों की कार्यक्षमता सामान्य या लगभग सामान्य रहती है।
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बैडमिंटन : नितेश-थुलासिमाथी का पदक तय
नागोया। नितेश कुमार और थुलासिमथी मुरुगेसन की भारतीय जोड़ी ने सोमवार को बैडमिंटन प्रतियोगिता के मिश्रित युगल में एसएल3-एसयू5 ग्रुप बी के सेमीफाइनल में पहुंचकर पदक पक्का कर लिया। भारतीय जोड़ी को अपने पहले मैच में चीन की यांग जियानयुआन और यांग किउक्सिया से वॉकओवर मिला। इसके बाद उन्होंने चीन के चेन पेंगफेई और हुआंग ज़िक्सुआन को सिर्फ 23 मिनट में 21-4, 21-18 से हराकर ग्रुप रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया।
पेरिस पैरालंपिक के चैंपियन नितेश ने पुरुष एकल एसएल3 श्रेणी के ग्रुप ए में दक्षिण कोरिया के जू डोंगजे को 21-13, 21-15 से हराकर आसान जीत दर्ज की। रुथिक रघुपाथी ने एसयू5 ग्रुप सी मैच में थाईलैंड के सोमसिरी प्रिचा पर 21-12, 21-12 से जीत दर्ज की।
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तैराकी : रवि की चांदी
नागोया। रवि कार्तिक बुडिगिना ने सोमवार को पुरुषों की 100 मीटर फ्रीस्टाइल एस13 स्पर्धा में रजत पदक जीता। बुडिगिना ने 56.68 सेकंड का समय लेकर दूसरा स्थान हासिल किया। उज्बेकिस्तान के एगोर बोलोटोव ने 52.90 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। कजाखस्तान के विक्टर वोल्कोव (57.23 सेकंड) ने कांसा जीता। एस13 वर्ग दृष्टिबाधित खिलाड़ियों के लिए है। हालांकि, पैरालंपिक खेलों में पात्र दृष्टिबाधित खिलाड़ियों की श्रेणियों में इस वर्ग के खिलाड़ियों की दृष्टि संबंधी अक्षमता सबसे कम होती है।
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सौम्या और रिंकू के स्वर्ण पदक
सौम्या ने महिलाओं की 1500 मीटर टी12-टी13 स्पर्धा में स्वर्ण और राधा वेंकटेश ने रजत पदक जीता। पहली बार इन खेलों में चुनौती पेश करने वाली सौम्या पांच मिनट 12.39 सेकंड का समय लेकर शीर्ष पर रहीं। राधा पांच मिनट 30.90 सेकंड के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। दृष्टिबाधित खिलाड़ियों के लिए आयोजित इस स्पर्धा में सौम्या के गाइड कुमार भरत थे जबकि राधा के साथ गोविंद सोलंकी ने गाइड की भूमिका निभाई। जापान की माना सासाकी तीसरे स्थान पर रहीं।
टी11 से टी13 तक की स्पर्धाएं दृष्टिबाधित खिलाड़ियों के लिए होती हैं। टी11 वर्ग में ऐसे खिलाड़ी भाग लेते हैं जिन्हें बिलकुल दिखाई नहीं देता या वे लगभग पूरी तरह दृष्टिहीन होते हैं जबकि टी13 वर्ग में गंभीर दृष्टिबाधिता होती है। टी12 वर्ग के खिलाड़ियों की दृष्टिबाधिता इन दोनों वर्गों के बीच होती है।
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रिंकू ने अजीत को नौ सेंटीमीटर से पीछे छोड़ा
रिंकू ने पुरुषों की भाला फेंक एफ46 स्पर्धा में स्वर्ण और अजीत सिंह ने रजत पदक अपने नाम किया। रिंकू ने 65.11 मीटर भाला फेंककर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने अजीत को महज नौ सेंटीमीटर के अंतर से पीछे छोड़ा। अजीत ने 65.02 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक जीता। तीन खिलाड़ियों की इस स्पर्धा में इंडोनेशिया के आर सत्योनो ने 55.30 मीटर के थ्रो के साथ कांस्य पदक हासिल किया। एफ46 वर्ग उन खिलाड़ियों के लिए है जिनके हाथ में कोहनी के ऊपर या नीचे विच्छेदन हुआ हो या उन्हें इसी तरह की शारीरिक अक्षमता हो।
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