'जब तक सैनिक नहीं मरते…', सामने आई ट्रंप की सीक्रेट बातचीत, ईरान जंग पर लगा है झटका – AajTak

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि वह ईरान पर फिर से ऑल-आउट वॉर तब तक नहीं शुरू करेंगे जब तक कि कोई अमेरिकी सैनिक नहीं मरता. उनकी यह बात तब सामने आई है जब यूएस हाउस ने उनकी वॉर पॉवर पर रोक लगा दी है. इसका मतलब है कि वह ईरान में जंग जारी नहीं रख पाएंगे और वह किसी तरह के नए स्ट्राइक का आदेश नहीं दे पाएंगे. इसे राष्ट्रपति ट्रंप के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है.
वॉल स्ट्रीट जरनल की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने साथियों से प्राइवेट में कहा है कि अगर तेहरान अमेरिकी सैनिकों को मारता है, तो वह ईरान के साथ सीज़फ़ायर खत्म करने पर विचार करेंगे. उन्होंने जोर देकर कहा कि लगातार हिंसक झड़पों के बावजूद एयरस्ट्राइक पर हफ्तों से रोक लगी हुई है.
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रिपब्लिकन बहुमत वाले अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने बुधवार को एक प्रस्ताव पारित किया, जिसके तहत राष्ट्रपति की युद्ध संबंधी शक्तियां सीमित हो जाएंगी और ईरान में जारी सैन्य कार्रवाई पर रोक लगेगी.
रिपब्लिकन सांसद भी जंग खत्म करने के पक्ष में
हाउस में यह प्रस्ताव 215 के मुकाबले 208 वोटों से पास हुआ. खास बात यह रही कि ट्रंप की अपनी रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों ने भी डेमोक्रेट्स का साथ देते हुए प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया. प्रस्ताव में राष्ट्रपति ट्रंप को निर्देश दिया गया है कि वह ईरान से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाएं, जब तक कि कांग्रेस औपचारिक रूप से युद्ध की घोषणा न करे या सैन्य कार्रवाई की अनुमति न दे.
हालांकि फिलहाल इसका असर प्रतीकात्मक माना जा रहा है, क्योंकि इसे कानून बनने के लिए अमेरिकी सीनेट से भी मंजूरी मिलनी जरूरी है. इसके अलावा संवैधानिक विशेषज्ञों के बीच इस बात पर भी बहस है कि क्या कांग्रेस द्वारा पारित ऐसे “वॉर पावर्स रिजॉल्यूशन” राष्ट्रपति पर कानूनी रूप से बाध्यकारी होंगे या नहीं.
ट्रंप की अपनी ही पार्टी में बढ़ रहा मतभेद
फिर भी यह मतदान ट्रंप प्रशासन के लिए एक अहम राजनीतिक संकेत माना जा रहा है. ईरान के खिलाफ तीन महीने से अधिक समय से चल रहे सैन्य अभियान को लेकर अब रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी असहजता बढ़ती दिखाई दे रही है. इससे पहले ऐसे तीन प्रस्ताव हाउस में असफल हो चुके थे, लेकिन हर बार समर्थन बढ़ता गया. पिछले महीने रिपब्लिकन नेतृत्व ने इस प्रस्ताव पर वोटिंग भी टाल दी थी क्योंकि इसके पास होने की संभावना बढ़ गई थी.
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इस बीच सीनेट में भी इसी तरह का एक प्रस्ताव वोटिंग में आगे बढ़ चुका है, हालांकि उस पर अंतिम मतदान की तारीख अभी तय नहीं हुई है. डेमोक्रेट सांसदों का कहना है कि अमेरिकी संविधान के मुताबिक युद्ध घोषित करने का अधिकार कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास. उनका आरोप है कि ट्रंप ने स्पष्ट रणनीति के बिना अमेरिका को एक लंबे संघर्ष में धकेल दिया है. साथ ही ईरान पर अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद पेट्रोल, खाद्य पदार्थों और अन्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी को भी मुद्दा बनाया जा रहा है.
ट्रंप को मैसेज, डेमोक्रेट्स की रणनीति
प्रस्ताव के प्रायोजक और हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के वरिष्ठ डेमोक्रेट सदस्य ग्रेगरी मीक्स ने कहा कि यह वोट एक महत्वपूर्ण मोड़ है. उनके मुताबिक अब अधिक रिपब्लिकन सांसद भी अपने मतदाताओं की उस भावना को समझ रहे हैं, जो मध्य पूर्व में एक और लंबी जंग नहीं चाहते.
हालांकि ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है. वहीं रिपब्लिकन समर्थक इस प्रस्ताव को डेमोक्रेट्स की राजनीतिक रणनीति बता रहे हैं. इसके बावजूद हाउस में मिली मंजूरी ने साफ संकेत दे दिया है कि ईरान युद्ध को लेकर वॉशिंगटन में राजनीतिक सहमति कमजोर पड़ रही है और ट्रंप को अब कांग्रेस के बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ सकता है.
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