सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में सरकारी निविदाएं कुछ खास कंपनियों को दिलाने के लिए कमीशन लेने और बिचौलिये की भूमिका निभाने वाले ठेकेदार रिशु श्री को गिरफ्तारी से मंगलवार को चार हफ्ते के लिए राहत दे दी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने ठेकेदार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा की दलीलों पर गौर किया और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कहा कि वह अगले चार हफ्तों तक उसे गिरफ्तार न करे। मुख्य न्यायाधीश ने आदेश में कहा कि हम चार हफ्ते के लिए सुरक्षा देते हैं और (पटना) हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर करने की छूट देते हैं।
हाईकोर्ट से अनुरोध है कि वह सुरक्षा अवधि के दौरान ही जमानत याचिका पर फैसला करे। हालांकि, पीठ ने हाईकोर्ट के 18 मई के उस आदेश में दखल देने से इनकार किया, जिसमें आरोपी की उसके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने की याचिका खारिज की गई थी। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी ने हाईकोर्ट से जमानत नहीं मांगी, बल्कि ईडी द्वारा उसके खिलाफ दर्ज मामला रद्द करने की मांग की। वकील मनोहर प्रताप के जरिये शीर्ष अदालत में दायर याचिका में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज बयानों के आगे उपयोग को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
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