मुजफ्फरपुर, वरीय संवाददाता। राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच) के गड्ढ़े अब ड्रोन से गिने जाएंगे। इसके साथ ही एनएच किनारे परिसंपत्तियों की डिजिटल सूची बनाने, उनकी डिजिटल निगरानी करने और अतिक्रमण की भी पहचान की जाएगी। एनएचएआई इसके लिए एनएच के संचालन और रखरखाव के लिए अब डाटा एकीकृत करने की योजना पर काम कर रहा है। इसके लिए वह ड्रोन की मदद से एनएच के पड़े गड्ढों, दरारों और संरचनात्मक खराबी संबंधी डाटा जुटाएगा।
इस संबंध में एनएचएआई मुख्यालय ने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों के अलावा परियोजना क्रियान्वयन ईकाइयों के प्रमुखों को पत्र लिखा है। इसके अनुसार, एनएचएआई अब एनएच के रखरखाव के लिए पूरी तरह से आधुनिक तौर तरीकों का उपयोग करने की ओर बढ़ रहा है। ऐसा करने से पारंपरिक तौर तरीके के इस्तेमाल के कारण लगने वाले समय में कटौती की जा सकेगी। इसके अलावा एनएच पर वाहन चालकों के पहले से कहीं अधिक परिचालन सुविधा मिलने लगेगी।
कहा गया है कि इसके लिए एनएचएआई ने एक ड्रोन एनालिटिक्स मॉनिटरिंग सिस्टम (डीएएमएस) का उपयोग कर रहा है। इसके तहत फॉलिंग वेट डिफ्लेक्टोमीटर परीक्षण भी किया जाता है, जो फुटपाथों के संरचनात्मक मजबूती का आकलन करता है। इससे एनएच में आने वाली टूटन का पहले से ही पता लगाया जा सकता है। पहले से पता लग जाने से समय रहते मरम्मत में आसानी होती है। यही नहीं, डीएएमएस के माध्यम से सड़कों में आए खुरदुरापन, गड्ढ़े, दरारें और अन्य संरचनात्मक खराबी की पहचान की जा सकेगी। साथ ही, एनएच पर नेटवर्क सर्वे व्हीकल्स भी तैनात किए जा रहे हैं।
पत्र में जिक्र किया गया है कि इन सभी माध्यमों से एकत्रित डाटा को एकीकृत किया जाएगा। इसका लाभ संचालन और रखरखाव में मिलेगा। इससे खंडित निरीक्षणों की जगह नियमित और केंद्रीकृत आकलन करने में मदद मिलेगी। इससे किसी भी तरह की गड़बड़ी को ठीक करने में कम से कम लगेगा। इसके अलावा उन्नत निगरानी तकनीक, एआई, और डाटा आधारित बेहतर रखरखाव से एनएच की आयु बढ़ाते हुए विश्वस्तरीय यात्रा का अनुभव कराने में मदद करना है。
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