बेतिया, विधि संवाददाता। पॉक्सो एक्ट से जुड़े एक मामले में 8 वर्ष बीत जाने के बाबजूद कांड का विधिवत अनुसंधान पूरा नहीं किए जाने एवं प्रगति प्रतिवेदन समर्पित नहीं किए जाने पर न्यायालय ने शिकारपुर थानाध्यक्ष के खिलाफ मंगलवार को संज्ञान लिया है। न्यायालय ने थानाध्यक्ष के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा-211 के तहत संज्ञान लिया है।
अपर जिला सत्र न्यायाधीश सप्तम सह पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश रंजन कुमार रैना ने थानाध्यक्ष के विरुद्ध यह कार्रवाई शिकारपुर थाना कांड संख्या-38/2018 में की है। जारी आदेश में न्यायाधीश ने कहा है कांड के सूचक संजय पासवान के लिखित आवेदन के आधार पर शिकारपुर पुलिस ने 8 फरवरी 2018 को धारा- 376, पॉक्सो एक्ट की धारा-4 एवं एससी-एसटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज किया था । जबकि इस तरह के मामले में तीन माह के भीतर अनुसंधान पूर्ण कर न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित कर दिया जाना चाहिए।
न्यायालय के द्वारा इस संदर्भ में उनसे प्रगति प्रतिवेदन भी तलब की गई थी। बावजूद उनके द्वारा अभी तक कोई प्रतिवेदन हीं न्यायालय में समर्पित किया गया। न्यायाधीश ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। लेते हुए शिकारपुर थानाध्यक्ष को अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में लापरवाही के लिए उन्हें जिम्मेवार माना है। न्यायालय ने थानाध्यक्ष को 29 जून को न्यायालय में उपस्थित होकर जवाब देने को कहा है।
स्पष्ट किया है कि अगर थानाध्यक्ष उक्त तिथि को न्यायालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष नहीं रखते हैं तो माना जाएगा कि उन्हें अपने पक्ष में कुछ नहीं कहना है। कोई सफाई नहीं देनी है । उनके विरुद्ध विधि सम्मत कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कर दी जाएगी। न्यायालय आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित कराए जाने को ले आदेश की प्रति एसपी तथा डीआईजी को भी भेजने का आदेश दिया है।
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