दस सेकेंड के नि:शब्द वीडियो ने कंपा दिया कलेजा, मोतीबाग हादसे में पांच की मौत – Hindustan

मोतीबाग के सत्य निकेतन में पीजी ढहने के करीब डेढ़ घंटे बाद एआरएसडी कॉलेज के ग्रुप में आए एक वीडियो ने सबके रौंगटे खड़े कर दिए। दस सेकेंड के इस वीडियो के आखिर के तीन सेकेंड में दिखा एक चेहरा…कोई शब्द नहीं। चेहरा देखते ही छात्र चिल्ला उठे… अरे ये तो शायद आदित्य है।

छात्रों ने बताया कि यह छात्र आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज का है और इसी पीजी में रहता है। हालांकि, देर रात तक भी छात्र का सही नाम और कॉलेज पता नहीं चल पाया। कुछ उसे आदित्य बुला रहे थे तो कुछ छात्र अर्पित। बहरहाल, वीडियो में केवल उसका चेहरा दिख रहा था, क्योंकि पूरा शरीर मलबे में दबा था। उसने कुछ नहीं बोला, शायद बोल ही नहीं पा रहा हो, बस वीडियो बनाकर इस उम्मीद में भेज दिया कि उसे ढूंढ लिया जाएगा।

यह वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल हुआ। चंद मिनट में ही यह मोतीलाल नेहरू कॉलेज के छात्र जैशल के मोबाइल पर आया। जैशल बोला, जब मेरे पास वीडियो आया तो मैं उस समय सत्य निकेतन में ही था। मैं भागकर सीधे बचावकर्मियों के पास पहुंचा और उन्हें ये वीडियो दिखाया। उन लोगों ने मुझे मदद का आश्वासन देकर घटनास्थल से थोड़ा दूर हो जाने को कहा। इधर, कॉलेज के ग्रुप में लगातार उस छात्र को बचाने की गुहार लगाई जा रही थी, जैशल बोला, जो लोग जानते थे कि मैं वहीं मौजूद हूं वो मुझे लगातार कॉल कर रहे थे। मैं बेबस था, छटपटा रहा था।

जैशल ने कहा, कुछ देर बाद मैं फिर पुलिस के पास पहुंचा तो उन्होंने कहा कि आप चिंता ना करें छात्र को बचा लिया जाएगा। सोशल मीडिया पर भी लोग इस शख्स के बच जाने की कामना कर रहे थे। एआरएसडी अस्प्ताल की प्रिंसिपल से बात करने की कोशिश की गई मगर बात नहीं हो पाई, हालांकि एम्स अस्पताल से देर रात मिली जानकारी के अनुसार, वहां आदित्य नामक एक युवक भर्ती है।

डीयू के दक्षिणी परिसर के पास सत्य निकेतन की एक संकरी गली में लड़कों के पेइंग गेस्ट (पीजी) के रूप में इस्तेमाल हो रही करीब 30 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत रविवार दोपर ढह गई। इस हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई जबकि मलबे में फंसे करीब 15-20 और लोगों को निकालने के लिए रात तक कई एजेंसियों का बचाव अभियान जारी रहा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के ‘लाइव हिन्दुस्तान’ के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ और ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।
अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का ‘C सर्टिफिकेट’ भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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