कोरियाई युद्ध के बाद बंजर हुए दक्षिण कोरिया ने एक महत्वाकांक्षी वृक्षारोपण अभियान चलाकर 10 अरब से अधिक पेड़ लगाए। …और पढ़ें
दक्षिण कोरिया ने 10 अरब से ज्यादा पेड़ लगाए गए।
कोरियाई युद्ध के बाद बंजर भूमि का पुनरुद्धार।
सरकार और जनता के सहयोग से 10 अरब पेड़ लगाए।
तापमान में 1.9 डिग्री सेल्सियस की कमी आई।
डिजिटल डेस्क, सियोल। कभी कोरियाई युद्ध की विभीषिका झेलने के बाद दक्षिण कोरिया के पहाड़ पूरी तरह बंजर और वीरान हो चुके थे। यहां तक कि देश की 40 लाख हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि को बंजर या खराब मान लिया गया था। लेकिन, देश ने हार नहीं मानी और एक ऐसा इतिहास रचा जो आज पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन चुका है।
ताजा रिपोर्ट की माने तो दक्षिण कोरियाई सरकार की सख्त नीतियों, योजनाओं और गांव वालों के सहयोग से देश में 10 अरब से ज्यादा पेड़ लगाए गए। इतना ही नहीं ईंधन के लिए खास तौर पर बागान तैयार किए गए ताकि जंगलों को काटा न जा सके। आइए जानते हैं इस अद्भुत बदलाव की पूरी कहानी, जो अब पर्यावरण और तापमान को नियंत्रित करने में भी बड़ी भूमिका निभा रही है।
बता दें कि 1950 के दशक में कोरियाई युद्ध खत्म होने के बाद दक्षिण कोरिया की प्राकृतिक खूबसूरती लगभग खत्म हो चुकी थी। पेड़-पौधे कट चुके थे, जमीन बंजर थी और देश के बड़े हिस्से वीरान नजर आते थे।
स्थिति को बदलने के लिए 1960 के दशक से दक्षिण कोरिया ने एक महत्वाकांक्षी वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत की। इसमें सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि आम जनता और गांवों के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। फलस्वरूप सरकार की सख्त नीतियों, योजनाओं और गांव वालों के सहयोग से देश में 10 अरब से ज्यादा पेड़ लगाए गए।
इसके साथ ही ईंधन के लिए खास तौर पर बागान तैयार किए गए ताकि जंगलों को काटा न जा सके। जंगलों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम लागू किए गए और उनकी लगातार देखभाल की गई।
ध्यान देने वाली बात यह है कि इस लंबी योजना का परिणाम बेहद शानदार रहा। दक्षिण कोरिया द्वारा बड़े पैमाने पर पेड़ लगाने के इस अभियान से वहां का तापमान 1.9 डिग्री सेल्सियस तक कम हो गया, जिससे जलवायु परिवर्तन के असर को रोकने में बड़ी मदद मिली।
इसके बाद साल 1953 में जहां प्रति हेक्टेयर औसतन केवल 5.7 क्यूबिक मीटर लकड़ी उपलब्ध थी, वहीं 2020 तक यह बढ़कर 165 क्यूबिक मीटर प्रति हेक्टेयर हो गई। फलस्वरूप आज दक्षिण कोरिया के कुल भूभाग का लगभग 63% हिस्सा घने जंगलों से ढका हुआ है।
गौरतलब है कि यह कहानी साबित करती है कि अगर लंबी सोच, मजबूत इच्छाशक्ति, कड़े कानून और जनता का साथ हो, तो किसी भी उजड़े हुए पर्यावरण को फिर से संवारा जा सकता है। हालांकि, आज दक्षिण कोरिया के इन जंगलों के सामने जलवायु परिवर्तन, भीषण जंगल की आग, पेड़ों की बीमारियां और पुराने होते पेड़ जैसी नई चुनौतियां खड़ी हैं, जिनसे निपटने के लिए देश अब नए सिरे से तैयारी कर रहा है।