ईरान के साथ संघर्ष के बाद अमेरिका का पेंटागन गंभीर हथियारों की कमी से जूझ रहा है, खासकर सटीक मिसाइलों और एयर-डिफेंस सिस्टम में। …और पढ़ें
डोनाल्ड ट्रंप और पीट हेगसेथ।
डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। ईरान के साथ बीते पांच महीनों से ज्यादा समय जारी संघर्ष के बीच अब एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्टस में दावा किया जा रहा है ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच अब अमेरिका का रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) गंभीर हथियारों की कमी से जूझ रहा है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के साथ हुए पांच महीने लंबे संघर्ष के बाद अमेरिकी सेना के पास मौजूद सटीक मिसाइलों और एयर-डिफेंस सिस्टम के स्टॉक में भारी गिरावट आई है। ऐसे में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, पेंटागन ने देश की प्रमुख डिफेंस कंपनियों को नोटिस जारी कर 21 दिनों के भीतर उत्पादन तेज करने की विस्तृत योजना पेश करने का निर्देश दिया है।
सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के पास मौजूद मिसाइल-डिफेंस सिस्टम जैसे THAAD और Patriot के स्टॉक में 38% से लेकर 65% तक की भारी गिरावट आई है। बता दें कि ईरान के खिलाफ जंग में अमेरिका ने 1000 से ज्यादा टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। ऐसे में अब पुरानी धीमी उत्पादन दर के कारण इन्हें दोबारा तैयार होने में कई साल लग सकते हैं।
दूसरी तरफ अमेरिकी रक्षा योजनाकारों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया के बाद इंडो-पैसिफिक क्षेत्र (जैसे चीन या ताइवान को लेकर) में कोई नया संकट खड़ा होता है, तो मौजूदा खाली स्टॉक अमेरिका की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। इसे विशेषज्ञ ‘कमजोरी का दौर’ मान रहे हैं।
उप-रक्षा सचिव स्टीव फीनबर्ग ने कंपनियों को साफ निर्देश दिया है कि वर्षों पुरानी उत्पादन प्रक्रियाओं को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कंपनियों को डिलीवरी की रफ्तार और उत्पादन क्षमता दोनों को कई गुना बढ़ाना होगा।
इसके साथ ही लॉकहीड मार्टिन और नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन जैसी कंपनियों के साथ 3 अरब डॉलर से अधिक के समझौते किए गए हैं ताकि पैट्रियट और थाड के पुर्जे और रॉकेट मोटर्स का उत्पादन तेजी से बढ़ाया जा सके। पेंटागन का लक्ष्य पैट्रियट का उत्पादन तीन गुना और थाड का चार गुना करना है।
CSIS के अनुसार, इस्तेमाल किए गए हथियारों की भरपाई करने में समय लगेगा। थाड और पैट्रियट के स्टॉक को 2029 के अंत तक, जबकि टोमाहॉक मिसाइलों को 2030 के अंत तक ही पूरी तरह से रिकवर किया जा सकता है।
इस बात को ऐसे समझिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हथियारों की भारी कमी की खबरों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि अमेरिका के पास हथियारों का विशाल भंडार है और जरूरत के मुताबिक नए हथियार लगातार तैयार किए जा रहे हैं। पेंटागन का भी कहना है कि अमेरिकी सेना के पास आज के समय में ऑपरेशन चलाने के लिए पर्याप्त हथियार मौजूद हैं, लेकिन युद्ध के दौरान इस्तेमाल हुए विशाल जखीरे को फिर से भरने में लंबा समय लगेगा।
इस बीच, कांग्रेस (संसद) में रक्षा बजट को लेकर भी खींचतान चल रही है। राष्ट्रपति ट्रंप प्रशासन ने रक्षा बजट को बढ़ाकर करीब 1.5 ट्रिलियन डॉलर करने का प्रस्ताव रखा है, जिस पर अभी बहस जारी है। जहां अत्यंत आधुनिक हथियारों की इस कमी से निपटने के लिए अमेरिका अब अपनी डिफेंस इंडस्ट्री को युद्ध स्तर पर अपग्रेड करने में जुट गया है।
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