कोलकाता, एजेंसी। नौसेना की समुद्री सुरक्षा, निगरानी और त्वरित कार्रवाई क्षमताओं को और मजबूत करने के उद्देश्य से ‘गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड’ (जीआरएसई) ने अगली पीढ़ी के स्वदेशी अपतटीय गश्ती पोत (एनजीओपीवी) ‘श्रुति’ का मंगलवार को जलावतरण किया। यह जीआरएसई द्वारा बनाए जा रहे चार अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती युद्धपोतों में से दूसरा है। पहला पोत ‘संघमित्रा’ का जलावतरण इस वर्ष 20 मई को किया गया था। इनके निर्माण के लिए 30 मार्च, 2023 को अनुबंध हुआ था। इन पोतों को हिंद महासागर क्षेत्र में देश के समुद्री, आर्थिक और सामरिक हितों की रक्षा के साथ-साथ नौसेना की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत इन पोतों में बड़ी संख्या में स्वदेशी उपकरण और प्रणालियां लगाई गई हैं।
ये पोत लंबे समय तक समुद्र में तैनात रह सकते हैं और कई तरह के अभियान में इस्तेमाल किए जा सकेंगे। इनका इस्तेमाल समुद्री निगरानी, समुद्री डकैती रोकने, घुसपैठ और अवैध शिकार पर अंकुश लगाने तथा विशेष अभियानों के लिए किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल गैर-लड़ाकू लोगों को सुरक्षित निकालने, मानवीय सहायता और आपदा राहत तथा खोज एवं बचाव अभियानों में भी किया जा सकेगा। पोत में हेलीकॉप्टर के संचालन की सुविधा भी है। विशेष अभियानों के लिए इसमें आधुनिक हेलीकॉप्टर संचालन प्रणाली लगाई गई है।
पोत की लंबाई 113 मीटर और चौड़ाई 14.6 मीटर है। इसका विस्थापन करीब 3,000 टन है और यह अधिकतम 23 समुद्री मील की गति से चल सकता है। 14 नॉट की गति से यह करीब 8,000 समुद्री मील की दूरी तय कर सकता है।
पोत में आधुनिक हथियार और निगरानी उपकरण लगाए गए हैं। इनमें सुपर रैपिड गन, एके-630, रिमोट कंट्रोल गन और आधुनिक निगरानी प्रणाली शामिल हैं। पोत को पानी के भीतर संभावित खतरों से निपटने और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता से भी लैस किया गया है।
इस पोत पर 24 अधिकारी और 124 नौसैनिक तैनात किए जा सकेंगे। इसके नौसेना में शामिल होने से समुद्री निगरानी और सुरक्षा को और मजबूत करने में मदद मिलेगी। ये बहुउद्देश्यीय पोत लंबे समय तक समुद्र में तैनात रह सकते हैं।
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