धीरेंद्र सिंह पालरिया
साल 1988 में जब विश्वनाथन आनंद भारत के पहले ग्रैंडमास्टर बने थे, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक दिन भारत ग्रैंडमास्टर्स का पावरहाउस बन जाएगा। उस समय देश में एक भी ऐसा मजबूत प्रशिक्षण तंत्र नहीं था, जहां खिलाड़ी विश्वस्तरीय तैयारी कर सकें।
आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। जुलाई 2026 तक भारत के 99 ग्रैंडमास्टर हो चुके हैं और देश 100 ग्रैंडमास्टर का आंकड़ा छूने से सिर्फ एक कदम दूर है। हाल ही रतनवेल वीएस भारत के 99वें ग्रैंडमास्टर बने हैं। अब शतरंज की तैयारी किताबों तक सीमित नहीं रही। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, पीजीएन (पोर्टेबल गेम नोटेशन) फाइलें, स्टॉकफिश जैसे एआई इंजन और हजारों डिजिटल गेम्स ने खिलाड़ियों की तैयारी का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। यही वजह है कि अब छोटे शहरों के खिलाड़ी भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों की चालों का अध्ययन घर बैठे कर रहे हैं। राजस्थान से एकमात्र ग्रैंडमास्टर भीलवाड़ा के अभिजीत गुप्ता हैं जिन्हें 2008 में यह खिताब मिला था। वे कई बार राष्ट्रीय चैंपियन रह चुके हैं। भारत के शीर्ष खिलाड़ियों में गिने जाते हैं।
Copyright © 2024-25 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.