धनबाद, प्रमुख संवाददाता। टीबी मुक्त भारत अभियान को गति देने के लिए स्वास्थ्य विभाग पहल शुरू कर रहा है। अब ऐसे टीबी मरीजों की पहचान की जाएगी, जो सरकारी अस्पतालों की बजाए निजी डॉक्टरों से इलाज करा रहे हैं और दवा दुकानों से टीबी की दवाएं खरीद रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिले का कोई भी टीबी मरीज इलाज से वंचित न रहे। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग जिले के निजी डॉक्टर और दवा दुकानों से प्राप्त होने वाले आंकड़ों का विश्लेषण करेगा। यह पता लगाया जाएगा कि निजी डॉक्टरों के यहां कितने मरीजों में टीबी की पुष्टि हुई, कितनों ने इलाज शुरू किया और कितने मरीज नियमित रूप से दवाएं ले रहे हैं। इन सूचनाओं का मिलान किया जाएगा, ताकि ऐसे मरीजों की पहचान हो सके जो पीड़ित होने के बाद भी नियमित दवा नहीं ले रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की योजना है कि दवा दुकानों से टीबी की दवा खरीदने वाले मरीजों का सत्यापन किया जाए। यदि कोई मरीज सरकारी निगरानी से बाहर पाया जाता है तो स्वास्थ्य विभाग की टीम उनसे संपर्क कर उसे नि:शुल्क जांच, दवा और परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराएगी। साथ ही नियमित फॉलोअप के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मरीज इलाज बीच में न छोड़े। स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि कई मरीज सामाजिक संकोच, सुविधा या अन्य कारणों से निजी डॉक्टरों के पास इलाज कराते हैं। ऐसे मामले में काफी संख्या में मरीज दवा का कोर्स पूरा नहीं करते हैं। नतीजतन वे बीमारी से मुक्त नहीं हो पाते हैं। यही वजह है कि निजी क्षेत्र और दवा दुकानों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर मरीजों की पहचान करने की रणनीति बनाई गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि टीबी का समय पर पता लगाना और पूरा इलाज होना संक्रमण की शृंखला तोड़ने के लिए बेहद जरूरी है। इसलिए सरकारी और निजी स्वास्थ्य सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस पहल से छूटे हुए मरीजों तक इलाज पहुंचेगा। साथ ही जिले में टीबी उन्मूलन अभियान को मजबूती मिलेगी।
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