दुनिया युद्ध की चपेट में है. आए दिन दुनिया के किसी न किसी कोने में सैन्य टकराव की खबरें सामने आती रहती हैं. ऐसे में जानना दिलचस्प हो जाता है कि क्या दुनिया में ऐसा कोई डिफेंस सिस्टम है? जो परमाणु हमले को रोकने की क्षमता रखता हो.
आज की दुनिया में परमाणु हथियारों का खतरा लगातार बना हुआ है. ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या हमारे पास ऐसी मिसाइल डिफेंस सिस्टम हैं, जो इन विनाशकारी हमलों को पूरी तरह रोक सकें? क्या किसी देश के पास ऐसा कवच है जो उसे परमाणु हमलों से 100% बचा सके? इसका जवाब जितना आसान लगता है, उतना है नहीं. आइए सच जानते हैं.
परमाणु हमला एक बड़ी चुनौती
एक परमाणु हमला कोई साधारण मिसाइल हमला नहीं होता. अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBMs) अक्सर Mach 20 या उससे ज्यादा की गति से यात्रा करती हैं कि उन्हें रोकने के लिए कुछ सेकंड का ही समय मिलता है. ये मिसाइलें अक्सर एक साथ कई परमाणु वॉरहेड और नकली लक्ष्यों (Decoys) को ले जाती हैं, जिससे असली खतरे को पहचानना बेहद मुश्किल हो जाता है. अगर हमला बड़े पैमाने पर हो, तो इतनी सारी मिसाइलों को एक साथ रोकना लगभग नामुमकिन हो जाता है.
कैसे काम करते हैं मिसाइल डिफेंस सिस्टम?
मिसाइल डिफेंस सिस्टम का मुख्य काम दुश्मन की मिसाइल को पता लगाना, नजर रखना और फिर रोकना होता है. इसमें कई चरण होते हैं. शुरुआती चरण यानी बूस्टर फेज, मिड-कोर्स फेज और अंतिम चरण यानी टर्मिनल फेज. जब वह लक्ष्य के करीब आती है. तो इन तीनों चरणों में उसे रोकने की कोशिश की जाती है, लेकिन हर चरण की अपनी चुनौतियां हैं.
भारत के डिफेंस सिस्टम की ताकत?
भारत भी अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत करने में लगा है. भारत का अपना बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रोग्राम है, जो दो स्तरों वाला सिस्टम है. इसमें पृथ्वी एयर डिफेंस और एडवांस्ड एयर डिफेंस जैसे इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल हैं. इन मिसाइलों को आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है.
इस सिस्टम में एडवांस रडार, कमांड और कंट्रोल सेंटर, और इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल हैं, जो एक साथ मिलकर काम करती हैं. भारत ने अपने BMD सिस्टम के सफल परीक्षण किए हैं और यह कुछ खास तरह के खतरों के खिलाफ सुरक्षा कवच देने का काम करता है.
आखिर क्या है सच?
रक्षा विशेषज्ञों और रणनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, सच्चाई यह है कि अभी तक दुनिया में कोई भी ऐसा मिसाइल डिफेंस सिस्टम नहीं है जो परमाणु हथियारों के बड़े पैमाने पर किए गए हमले को 100% रोकने की गारंटी दे सके. भले ही ये सिस्टम कुछ मिसाइलों या छोटे हमलों को रोकने में सक्षम हों, लेकिन अगर दर्जनों या सैकड़ों परमाणु हथियार दागे जाएं, तो किसी भी सिस्टम के लिए उन सभी को रोकना लगभग नामुमकिन होगा.
परमाणु हथियारों के मामले में अगर एक या दो मिसाइलें भी अपने लक्ष्य तक पहुंच जाती हैं, तो उसके विनाशकारी परिणाम होंगे. इसीलिए, परमाणु युद्ध को रोकने का असली आधार ‘म्यूचुअल एश्योर्ड डिस्ट्रक्शन (MAD)’ यानी आपसी विनाश का डर ही कारगर है.
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