बंगाल में बिना मुकदमे 12 माह तक निरोध और दंगाइयों की संपत्ति जब्त करने वाले दो कानून लागू – Jagran

बंगाल में सोमवार से दो नए कानून लागू हो गए हैं, जिनके तहत पुलिस को संगठित अपराध और हिंसक प्रदर्शनों से निपटने के लिए व्यापक अधिकार मिले हैं। …और पढ़ें
शुभेंदु अधिकारी, मुख्यमंत्री पश्चिम बंगाल।
राज्य ब्यूरो, जागरण, कोलकाता। बंगाल की भाजपा सरकार ने सोमवार से दो कानून लागू कर दिए। इन कानूनों के तहत पुलिस और प्रशासन को संगठित अपराध, हिंसक विरोध प्रदर्शन तथा असामाजिक गतिविधियों से निपटने के लिए व्यापक अधिकार दिए गए हैं। इनमें बिना मुकदमे के संदिग्धों को अधिकतम 12 माह तक निरोध में रखने तथा दंगाइयों की संपत्ति कुर्क कर नुकसान की भरपाई करने का प्रावधान शामिल है।
29 जून को विधानसभा से पारित पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधि नियंत्रण अधिनियम, 2026 (एंटी गुंडा कानून) और पश्चिम बंगाल लोक व्यवस्था अनुरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2026 सोमवार से प्रभावी हो गए।
एंटी गुंडा कानून के तहत जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस आयुक्त ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ निरोधात्मक आदेश जारी कर सकेंगे, जिनके असामाजिक गतिविधियों में शामिल होने की आशंका हो। इस आदेश को 15 दिन के भीतर राज्य सरकार की मंजूरी लेनी होगी, जबकि तीन सप्ताह के भीतर उच्च न्यायालय के सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले सलाहकार बोर्ड द्वारा इसकी समीक्षा की जाएगी।
कानून में ‘गुंडा’ की परिभाषा का दायरा भी बढ़ाया गया है। इसमें संगठित अपराध गिरोहों से जुड़े लोग, उनके वित्तपोषक या सहयोगी, शस्त्र अधिनियम, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और एनडीपीएस अधिनियम के बार-बार अपराध करने वाले आरोपित तथा समाज के लिए खतरनाक माने जाने वाले व्यक्तियों को भी शामिल किया गया है।
अधिनियम के तहत ऐसी गतिविधियां भी असामाजिक मानी जाएंगी, जिनसे लोगों में भय या दहशत फैले, लोक व्यवस्था प्रभावित हो, वैध व्यापार बाधित हो, अवैध कब्जा किया जाए या सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचे। अवैध खनन, अवैध बालू खनन, वन एवं वन्यजीव अपराध जैसे आर्थिक और पर्यावरण संबंधी अपराध भी इसके दायरे में लाए गए हैं।
कानून के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस आयुक्त संदिग्ध व्यक्तियों को अधिकतम एक वर्ष तक किसी निर्धारित क्षेत्र में प्रवेश करने से भी रोक सकेंगे। अधिनियम के सभी अपराध संज्ञेय और गैरजमानती होंगे, जिससे पुलिस बिना वारंट तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी कर सकेगी।
वहीं, लोक व्यवस्था अनुरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत दंगे या हिंसक प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक या निजी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई के लिए आरोपितों की संपत्ति कुर्क कर उसकी नीलामी की जा सकेगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इन कानूनों का बचाव करते हुए कहा कि राजनीतिक हिंसा, संगठित गिरोहों और तोड़फोड़ पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए कड़े कानूनी प्रावधान जरूरी थे।
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इन्हें दमनकारी बताते हुए आरोप लगाया कि इनका दुरुपयोग राजनीतिक विरोधियों और असहमति जताने वालों के खिलाफ किया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कानूनों के लागू होने का स्वागत करते हुए कहा कि इससे पुलिस को उपद्रव और गुंडागर्दी पर प्रभावी कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

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