बालाघाट में ‘सहमत’ संस्था के हिंदी पखवाड़े के समापन पर शुक्रवार को ‘अभिव्यंजन’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस साहित्यिक आयोजन में करीब 40 युवा और वरिष्ठ कवियों ने मां भारती और देश के ज्वलंत मुद्दों पर अपनी रचनाएं पेश की।
कार्यक्रम में स्थानीय और अंतरराज्यीय कवियों का संगम देखने को मिला, जिसमें बालाघाट से 31, सिवनी से 3 और पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के गोंदिया से 4 साहित्यकारों ने शिरकत की। सहमत संस्था के अध्यक्ष राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य साहित्य को जन-जन तक पहुंचाना और नई उभरती प्रतिभाओं को एक बेहतर मंच प्रदान करना है।
कवियों की कविताओं ने बांधा समां
कवि राजेंद्र शुक्ल कहा- सहज ने एक सौ अस्सी लोगों पर छाई मौत के मुंह को मोड़ दिया। शौर्य पराक्रम की गाथा में इतिहास अनोखा जोड़ दिया। प्राणों की परवाह किए बिन जग को स्मित देने वाले। भारत मां के बेटे ने आतंकी मंसूबा तोड़ दिया।
कवि प्रदीप दर्शन ने कहा- प्रीति है अपार, बड़ा धर्म मां भारती पे, जन-जन में प्रेम का, जन-जन में प्रेम का, खुमार होना चाहिए। तू जो पला है, बढ़ा इस भारत भूमि में तो, तेरी देशभक्ति बेसुमार होना चाहिए।
कवि मनोज बोरकर ने हर प्रांत में खूनी जलजला है, मेरी जान, अपना घर बहुत भला है। हर प्रांत में आज झगड़े हैं, लफड़े ही लफड़े हैं, झगड़ों में कहीं नदी, नहर, तलद्वाद है, तो कहीं मंदिर, मस्जिद की याद है, कहीं अलग देश है, नया परिवेश है, ऐसे में बाहर कहीं कहां जाना, अरे आदमी अपने घर में ही जिंदा रह जाए, यही बहुत बड़ी बात है।” इसके अलावा भी अन्य कवियों ने काव्यपाठ किया।
कार्यक्रम में ये अतिथि रहे मौजूद
इस साहित्यिक संध्या में नगरपालिका अध्यक्ष भारती ठाकुर, पूर्व नपाध्यक्ष रमेश रंगलानी, डॉ. बी.एम. शरणागत, योगेश चौबे, सेवानिवृत्त न्यायाधीश शरद श्रीवास्तव, राजेंद्र कुमार तिवारी, कवि दिनेश देहाती, अशोक सागर मिश्र, अर्चना गुप्ता और संजय श्रीवास्तव सहित कई गणमान्य नागरिक और साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
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