Mahu Ran Samvad 2025: महू में आर्मी वार कॉलेज के ‘रण संवाद 2025’ सेमिनार के दूसरे दिन रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने कभी युद्ध की शुरुआत नहीं की, लेकिन चुनौती मिलने पर मजबूत जवाब देना हमारी परंपरा है. उन्होंने आत्मनिर्भर भारत अभियान की उपलब्धियां गिनाते हुए बताया कि रक्षा उत्पादन 1.5 लाख करोड़ रुपये पार कर चुका है और स्वदेशी तकनीक से भारत अब विश्वस्तरीय हथियार बना रहा है.
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Rajnath Singh in MP: आर्मी वार कॉलेज में जारी दो दिवसीय त्रि-सेवा संगोष्ठी ‘रण संवाद 2025’ का आयोजन किया जा रहा है. इसका आज यानि बुधवार को दूसरा दिन है. इस मौके पर रक्षा मंत्री ने भारतीय सेना की ताकत, युद्धकला और हमारी प्राचीन परंपराओं को लेकर संबोधित किया. आपको बता दें कि कार्यक्रम में थलसेना, वायुसेना और नौसेना के शीर्ष अधिकारी, रक्षा विशेषज्ञ, उद्योग जगत से जुड़े लोग और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक भी मौजूद रहे. पूरे आयोजन में आधुनिक युद्धकौशल और भारतीय सोच की झलक देखने को मिली.
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने कभी किसी देश पर हमला नहीं किया और न ही युद्ध की शुरुआत की है. लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक हालात में अगर कोई हमारे देश को चुनौती देता है, तो उसे मजबूती से जवाब देना हमारी जिम्मेदारी है. इसके लिए मजबूत रक्षा तैयारी, नई तकनीक और मित्र देशों से संवाद जरूरी है. उन्होंने कहा कि समय के साथ रक्षा व्यवस्था को लगातार अपडेट करना बेहद जरूरी है ताकि बदलती चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास से किया जा सके.
‘रण संवाद’ के बारे में जानकारी
वहीं रक्षामंत्री की तरफ से ‘रण संवाद’ कार्यक्रम के बारे में बताते हुए कहा कि ‘रण’ युद्ध का प्रतीक है और ‘संवाद’ चर्चा और मेलजोल का प्रतीक माना जाता है. पहली नजर में ये दोनों अलग-अलग दिखाई देते हैं, लेकिन भारतीय संस्कृति में दोनों साथ-साथ चलते हैं. उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि युद्ध रोकने के लिए भगवान श्रीकृष्ण खुद शांति का संदेश लेकर गए थे. उन्होंने बताया कि भारतीय परंपरा में युद्ध से पहले, युद्ध के दौरान और युद्ध के बाद भी संवाद जारी रहता है. यही ‘रण संवाद’ का मूल संदेश है, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है.
रक्षा क्षेत्र में बड़े-बड़े सुधार किए
वहीं उन्होंने सेमिनार में आत्मनिर्भर भारत अभियान की उपलब्धियों को लेकर कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में रक्षा क्षेत्र में बड़े का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में रक्षा क्षेत्र में बड़े सुधार हुए हैं. स्वदेशी डिजाइन, विकास और उत्पादन पर जोर दिया गया है. वर्ष 2014 में देश का रक्षा उत्पादन करीब 46,425 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुका है. इसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है, जो अब 33,000 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गई है. यही वजह है कि भारत के रक्षा निर्यात दस साल पहले 1,000 करोड़ रुपये से भी कम थे और अब 24,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुके हैं.
स्वदेशी तकनीक के बारे में बताया
रक्षा मंत्री ने स्वदेशी तकनीक और हथियारों के बारे कहा कि आज देश में बने लड़ाकू विमान ‘तेजस’, आर्टिलरी गन सिस्टम, आकाश मिसाइल और स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर यह साबित कर रहे हैं कि भारत की तकनीक अब विश्वस्तरीय है. उन्होंने कहा कि अब भारत सिर्फ आयात पर निर्भर नहीं है बल्कि खुद अत्याधुनिक रक्षा उपकरण बना रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि देश ने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं और जल्द ही जेट इंजन निर्माण में भी भारत बड़ी उपलब्धि हासिल करेगा.
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