भूमि पैमाइस के तीन सौ से अधिक मामले लंबित – Live Hindustan

मछलीशहर, हिन्दुस्तान संवाद। गेहूं की फसल कटने के बाद शासन के निर्देशानुसार अप्रैल, मई और जून में अभियान चलाकर भूमि की पैमाइस कराई जाती है। हदबंदी के प्रकरण समय से निस्तारित होने पर किसान धान की खेती के लिए मेड़बंदी कर पाते हैं। समय पर पैमाइस होने से भूमि संबंधी विवादों का भी समाधान हो जाता है। भूमि विवाद के निस्तारण के लिए धारा 24 के तहत उपजिलाधिकारी न्यायालय में संबंधित भूमि का नक्शा, खसरा, खतौनी और बैंक में निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद चालान की प्रति के साथ वाद दाखिल किया जाता है। उपजिलाधिकारी के प्रारंभिक पैमाइस के आदेश के बाद संबंधित गांव के राजस्व निरीक्षक और लेखपाल पैमाइस कर फील्ड बुक के साथ न्यायालय में प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं।
इसके बाद पक्षकारों को नोटिस जारी कर सुनवाई की जाती है और अंतिम आदेश पारित होता है। पूरी प्रक्रिया में सामान्य तौर पर कई महीने लग जाते हैं। मई माह में हदबंदी के करीब 94 नए मुकदमे दाखिल हुए। इसके अलावा जनवरी से अप्रैल तक के लगभग दो सौ मुकदमे भी लंबित हैं। इनकी पत्रावलियां प्रारंभिक पैमाइस और रिपोर्ट के लिए संबंधित राजस्व निरीक्षकों के पास पड़ी हैं। वहीं पत्थरगड़ी से जुड़ी कई दर्जन पत्रावलियां भी राजस्व निरीक्षकों के कार्यालयों में लंबित हैं। वादकारी कई महीने से तहसील का चक्कर लगा रहे हैं। चुनाव के दौरान उन्हें कार्रवाई चुनाव के बाद होने का आश्वासन दिया जाता रहा। अब जून समाप्त होने और जुलाई में बारिश शुरू होने की संभावना के चलते समय पर पैमाइस होना मुश्किल माना जा रहा है। ऐसे में किसानों को अब धान की फसल कटने तक इंतजार करना पड़ सकता है। इससे कास्तकारों का समय और पैसा दोनों खर्च होंगे, जबकि भूमि विवाद भी लंबे समय तक बने रहने की आशंका है।
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