महाराष्ट्र के सरकारियो कर्मचारियों के लिए अनिवार्य हिंदी परीक्षा को रद्द कर दिया गया है. यह एग्जाम 28 जून को प्रस्तावित था. राज्य सरकार में मंत्री उदय सामंत ने बताया कि महाराष्ट्र सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों को अब हिंदी भाषा की परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं होगी.
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महाराष्ट्र में पिछले काफी समय हिंदी और मराठी भाषा को लेकर विवाद बढ़ा है. महाराष्ट्र नवनिर्मीण सेना (MNS) के नेता या शिवसेना (UBT) गुट के नेताओं ने राज्य सरकार के उस फैसले का विरोध किया है, जिसमें हिंदी को भी अनिवार्य करने की बात कही गई थी. महाराष्ट्र के भाषा विवाद के बीच एक नई खबर सामने आई है. राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने राज्य सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों की हिंदी भाषा टेस्ट पर रोक लगा दी है. इससे पहले यह परीक्षा 28 जून को प्रस्तावित थी.
इस बात की जानकारी फडणवीस सरकार के मंत्री उदय सामंत की ओर से दी गई. उन्होंने कहा कि सरकार ने भाषा का टेस्ट टालने का फैसला किया है. उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों को अब हिंदी भाषा की परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं होगी. उदय सामंत की ओर से कहा गया कि पत्रकार परिषद विभाग के सचिव से विस्तृत जानकारी मिलने के बाद यह फैसला राज्य सरकार ने लिया है. उन्होंने बताया कि टेस्ट हर साल 1976 के नियमों के हिसाब से होता था. अब 1976 के नियम के वेरिफाई किया जाएगा कि क्या है साल 2026 में भी प्रासंगिक है या नहीं?
1976 के नियम के बारे में जानिए
रिपोर्ट्स के अनुसार, महाराष्ट्र नागरिक सेवा (हिंदी भाषा परीक्षा) नियम, 1976 के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार के सभी राजपत्रित और अपत्रित कर्मचारी के लिए हिंदी का ज्ञान होना आवश्यक होता था. इस स्थिति में जिन कर्मचारियों ने अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान 10वीं में हिंदी विषय नहीं पढ़ा था उन्हें सरकारी सेवा में आने के बाद एक तय समयावधि के अंदर हिंदी भाषा परीक्षा पास करनी पड़ती थी. अगर कोई कर्मचारी परीक्षा पास नहीं कर पाता था, उस स्थिति में वेतन में बढ़ोतरी और पदोन्नति में समस्या आती थी.
हिंदी मराठी विवाद भी जानिए
ध्यान देने वाली बात है कि महाराष्ट्र में हिंदी का विरोध होना कोई नई बात नहीं है. पिछले कई दशक से महाराष्ट्र में मराठी अस्मिता और स्थानीय पहचान की नाम पर समय-समय पर हिंदी को लेकर विवाद खड़ा हो रहा है. हाल के दिनों में राज्य सरकार ने राज्य के सभी स्कूलों में कक्षा 1 से हिंदी को अनिवार्य करने का फैसला लिया था. हालांकि, सरकार के इस फैसले पर शिवसेना (UBT) और एमएनएस की ओर से जमकर विरोध किया गया था. इस विरोध के कारण सरकार ने इस फैसले को वापस लिया. अब राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की हिंदी परीक्षा पर रोक लगाई है.
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अभिनव त्रिपाठी जी न्यूज हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। डेस्क पर रियल टाइम की देश-विदेश की खबरों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय राजन…और पढ़ें
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